अब तक 110 खेतों में पहुंचा कृषि दल

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*खराब फसलों वाले क्षेत्र को किया चिन्हांकित

खरगोन।

कृषि व राजस्व विभाग के ग्रामीण विस्तार अधिकारी और पटवारी प्रतिदिन संयुक्त रूप से ऐसे क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे हैं, जहां कपास और सोयाबीन में जड़, सड़न सहित कीटों का प्रकोप हुआ है। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक भी किसानों की समस्या और फसलों में फैल रही बीमारियों को सुलझाने के लिए खेतों की ओर जा रहे है।

सहायक कृषि संचालक प्रकाश ठाकुर के अनुसार करीब 60 ग्रामीण विस्तार अधिकारी व 22 पटवारी किसानों से खाद बीज व बुआई की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। वे पंचनामा बनाकर कीटों की रोकथाम के संबंध में सुझाव भी दे रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक भी संयुक्त रूप से खेतों में पहुंच रहे हैं। अब तक 110 खेतों का दौरा किया जा चुका है।

25 गांवों में पहुंचकर

50 पंचनामे बनाए

दल द्वारा लगभग 250 किसानों से चर्चा कर समस्याएं जानी। 25 गांव से करीब 50 पंचनामे भी बनाए गए हैं। जड़, सड़न, रसचूसक कीट, पत्ते लाल होने और इल्ली के अधिक प्रकोप वाले गोगांवा, खरगोन, झिरन्या, भीकनगांव व भगवानपुरा है। इसी तरह कपास और सोयाबीन की फसलों में फैल रही बीमारियां बड़वाह, महेश्वर व कसरावद में कम प्रकोप सामने आया है। उपसंचालक कृषि एमएल चौहान, कृषि वैज्ञानिक डॉ. वायके जैन, डॉ. एमएल शर्मा, डॉ. अरुण खिरे आदि दल में शामिल हैं।

किसानों को दी ये सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने जड़ सड़न रोकने के लिए ऑक्सीक्लोराइड, डब्ल्यूपी का घोलकर टोआ करें। रसचूसक कीट पर नियंत्रण के लिए डायफन्यूरान या इमिडाक्लोपीड का स्प्रे करें। पत्तियां लाल होने पर डीएपी-पोटाश का घोल बनाकर छिड़काव करें। सोयाबीन में इल्ली व चक्र भृंग कीट पर नियंत्रण के लिए ट्राइजोफॉस या क्यूनालफॉस का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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