अरंडी की बुआई घटी, कीमतों में बढ़ौतरी

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अरंडी की बुआई चालू खरीफ सीजन में अब तक पिछले साल के मुकाबले करीब 45 फीसदी कम हुई है। इसका असर कीमतों पर भी दिखने लगा है। इस मॉनसून सीजन में अरंडी का भाव करीब 20 फीसदी चढ़ चुका है। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में बुआई पिछले साल से 75 फीसदी कम है।

चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई अपने अंतिम चरण में है। फसलों का बुआई रकबा पिछले साल के करीब पहुंच चुका है। तिलहन का रकबा पिछले साल से करीब 6 फीसदी अधिक होने का अनुमान है। तिलहन में सोयाबीन का रकबा पिछले साल से करीब 11 फीसदी अधिक है। लेकिन अरंडी की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 45 फीसदी कम हुई है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार तीन अगस्त तक देशभर में अरंडी की बुआई महज 1.50 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.72 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। साल 2014 के बाद यह सबसे कम रकबा है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस समय तक देशभर में अरंडी का रकबा औसतन 2.32 लाख हेक्टेयर पर पहुंच जाना चाहिए। खरीफ सीजन के दौरान अरंडी का सामान्य रकबा 10.47 लाख हेक्टेयर माना जाता है।

खरीफ सीजन की बुआई शुरू होने के पहले मंडियों में अरंडी का भाव 3,600 रुपए प्रति क्विटल के आसपास था, जो इस समय 4,300 रुपए प्रति क्विटल पर पहुंच गया है। वायदा बाजार में भी अरंडी महंगी हो रही है। एनसीडीईएक्स में 12 जून को अरंडी का भाव 3,937 रुपए प्रति क्विंटल था, जो इस समय बढक़र 4,639 रुपए पर पहुंच चुका है। एनसीडीईएक्स पर अरंडी अक्टूबर अनुबंध की कीमत 4,740 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है। इससे यह संकेत मिलता है कि आगे कीमतें और बढ़ेंगी।

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