किसानों के कर्ज व आत्महत्या का कारण सरकार की नीति, राममंदिर को लेकर भी वादाखिलाफी की

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लुटेरी सरकार के खिलाफ देशभर के 183 किसान संगठन आवाज उठाएंगे। सरकार ने राम मंदिर को लेकर वादाखिलाफी की, किसानों के साथ भी अन्याय किया। किसानों के कर्ज और आत्महत्या का कारण सरकार की नीतियां हैं। मैं राम मंदिर की लड़ाई भी लड़ूंगा और किसानों के हक के लिए भी लड़ूंगा।

यह बात विहिप के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कही। वे बुधवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा प्रारंभ की किसान अधिकार यात्रा के शुभारंभ पर भावगढ़ फंटा पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि या तो सरकार नीतियां बदले या फिर नीतियां ना बदलने वाली सरकार को ही बदला जाए। शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ ने कहा कि फसल बीमा योजना भी प्राइवेट कंपनियों की कमाई का षड्यंत्र बन गया है। अबकी बार किसानों की सरकार बनना चाहिए। पिछली सरकारें हर साल दाम बढ़ाती थीं लेकिन माेदी ने 4 साल में 200 रुपए बढ़ाए और खूब प्रचार किया। फल-सब्जी, दूध भी फसल गारंटी योजना में आए। किसानों का कर्ज माफ हो। समृद्ध किसान कर्जदार क्यों बना, यह चिंतन का विषय है। संभागीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि किसानों के हक की लड़ाई शुरू करने का मकसद न्याय पाना है। डीजल, बिजली, दवा, यूरिया सब महंगे हो गए लेकिन फसल के दाम नहीं बढ़े। देश तो आजाद हो गया लेकिन किसान कर्ज से मुक्त नहीं हो पा रहे इसलिए अधिकार यात्रा शुरू की जा रही। भावगढ़ फंटा पर घनश्याम धाकड़ चौराहा पर हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या मे किसान मौजूद थे। इसके बाद प्रचार रथ मंदसौर शहर से भी गुजरा। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा किसानों के हक में रखी जा रही मांगों को लेकर प्रचार हुआ। शाम को तोगड़िया इंदौर और कक्काजी नीमच के लिए रवाना हो गए।

75 दिनी अन्नदाता अधिकार यात्रा की शुरुआत पर तोगड़िया ने ट्रैक्टर चलाया और कक्काजी पास में बैठे। यात्रा में 6 कलश भी रखे गए हैं जो गोलीकांड के दिवंगत किसानों के गांवों की मिट्‌टी से भरे हैं। इस मामले में दोषियों पर एफआईआर ना होने का मुद्दा भी प्रमुखता से प्रदेशभर, देश के प्रमुख हिस्सों में उठाएंगे। यात्रा कई स्थानों पर जाएगी और किसानों को श्रद्धांजलि देंगे। संभाग अध्यक्ष शर्मा ने बताया सातवां कलश प्रदेश के 29000 किसानों के नाम पर है जिन्होंने आत्महत्याएं कीं। अन्नदाता अधिकार यात्रा का समापन भोपाल के जंबूरी मैदान में अक्टूबर में होगा। आंदोलन की बड़ी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यात्रा में किसान अपने ट्रैक्टर और अपने छोटे वाहनों के साथ इस रैली का हिस्सा बनते जाएंगे। यात्रा 75 दिन चलेगी।

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