किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ेगा फसल बीमा, देश के हर किसान तक पहुंचेगी सुविधा

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नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने किसानों को फसलों की बर्बादी से होने वाले नुकसान से बचाने तथा उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने को लेकर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

दरअसल, जिन किसानों के पास ये कार्ड हैं, उनकी फसल का बीमा तो स्वचालित माध्यम से हो जाता है, जबकि बिना कार्ड वाले किसान फसल बीमा लेने में कम रुचि दिखाते हैं। कृषि मंत्रालय की निगरानी में चल रही फसल बीमा योजना में यह भी सामने आया है कि कंपनियां बगैर कार्ड वाले किसानों से संपर्क साधने में लापरवाही बरतती हैं। इसका कारण यह है कि ऐसे किसानों को बीमा मुहैया कराने में कंपनियों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। केसीसी में किसानों को निर्धारित राशि तक उधार मिलता है और बैंक उस पर न्यूनतम ब्याज लेते हैं।

75 फीसदी किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष के अंत तक उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 42.25 लाख किसानों ने केसीसी अपनाया है और ये क्रियाशील हैं, जबकि दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र (22 लाख से ज्यादा) और तीसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश (18 लाख से अधिक) है।

मंत्रालय का इरादा सभी कार्ड को चालू हालत में लाना और अगले पांच साल में कम से कम 75 फीसदी किसानों को इससे जोड़ना है। इसके लिए सालाना लक्ष्य बैंकों को सौंपा जाएगा। साथ ही, बीमा कंपनियों को भी इस काम में शामिल किया जाएगा। वह उन किसानों को केसीसी से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगी, जो फसल बीमा से जुड़ गए हैं या जुड़ने वाले हैं लेकिन उनके पास कार्ड नहीं है।

कुल 2.35 करोड़ कार्ड ही सक्रिय
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, किसानों को 4.56 करोड़ से भी ज्यादा कार्ड जारी किए गए हैं। इनमें करीब 3.35 करोड़ कार्ड सहकारी बैंकों और 1.22 करोड़ कार्ड क्षेत्रीय बैंकों द्वारा जारी किए गए हैं। वर्तमान में, महज 2.35 करोड़ क्रेडिट कार्ड ही चालू हालत में हैं। गैर-क्रियाशील कार्ड वही हैं, जिनमें ऋण की राशि ज्यादा होने पर लेनदेन रोक दिया गया है। इन बंद कार्ड को चालू कराने के लिए कृषि मंत्रालय रूपरेखा तैयार कर रहा है।

फसल बीमा योजना के लिए वेबसाइट
सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के आवेदन, गणना, नुकसान और दावा सहित हर पहलू के लिए एक वेबसाइट तैयार किया है। इस वेबसाइट की शुरुआत जल्द की जाएगी, जो देश की 12 भाषाओं में होगी।

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