किसान, मजदूर और कर्मकारों पर बिजली के 9500 मामले वापस,10 करोड़ बकाया माफ

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जिला मुख्यालय पर शनिवार को लगाई गई विशेष लोक अदालत से हजारों बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। जिनके बिजली चोरी या बकाया राशि वसूली संबंधित मामले न्यायालयों में चल रहे थे या जिनके खिलाफ मामले बिजली कंपनी न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रही थी। इस तरह के किसान, मजदूर और कर्मकारों की संख्या जिले में साढ़े नौ हजार है। इनपर बिजली कंपनी द्वारा बिजली चोरी या नियम विरुद्ध बिजली लाइनों से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करने के मामले बनाए गए थे। इस तरह से जिले में 9 हजार 672 लोगों से बिजली कंपनी को 10 करोड़ 2 लाख रुपए की राशि वसूल करना थी। अब यह पूरी राशि माफ की जा रही है। ये सभी मामले बिजली कंपनी द्वारा वापस लेने और समझौता करने के लिए विशेष लोक अदालत में रख दिए गए हैं। शनिवार को विशेष लोक अदालत में लोगों की भीड़ लगी रही। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बीच के रकम का एक बड़ा हिस्सा मुकदमेबाजी में खर्च हो जाता। इसलिए जो मिल रहा है वह कंपनी की बैलेंस शीट को बेहतर ही करेगा। कंपनी ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर विशेष लोक अदालत में शामिल होने के लिए बुलाया था। अाधा पैसा सरकारी व आधा बिजली कंपनी करेगी वहन : मामले वापस लिए जाने के साथ ही लोगों के 10 करोड़ 2 लाख रुपए की राशि के बिल भी माफ हो जाएंगे। माफ की गई राशि में से आधी राशि यानी कि 5 करोड़ एक लाख रुपए सरकार बिजली कंपनी को देगी। जबकि इतनी ही राशि बिजली कंपनी खुद वहन करेंगी। इसका सीधा लाभ जिले के हजारों लोगों को मिलने लगा है। इससे बिजली कंपनी को हाेने वाले नुकसान को लेकर कंपनी के महाप्रबंधक रामनरेश सिंह ठाकुर ने बताया कि इन मामलों को अदालत में लेकर जाने और 6-7 सात साल तक मुकदमा लड़ने में भी काफी पैसा खर्च होता। वहीं समय की बर्बादी भी होती। सभी को नोटिस, प्रतिनिधि की उपस्थिति भी होगी मान्य लोक अदालत के दौरान पक्षकारों का मौजूद रहना अनिवार्य किया गया था। हालांकि सरकार ने इसमें थोड़ी रियायत दे दी है। यानि पक्षकार की जगह उसका प्रतिनिधि भी आया तो उसे मान्य किया गया है। दो तरह के मामले: पहला लिटिगेशन का मामला है। जिले में 2463 मामले किसानों, श्रमिकों और कर्मकारों के बिजली कंपनी से संबंधित ऐसे मामले जिनमें बिजली कंपनी ने न्यायालयों में चालान पेश कर दिया है और जो न्यायालयों में लंबित है। इन मामलों को भी वापस लिया गया है। इतना ही नहीं संबंधित लोगों को इसके लिए बिल अथवा जुर्माने की भी राशि जमा नहीं करानी पड़ी है। शासन के इस निर्देश के बाद जिले के 2463 लोगों को अब न्यायालय के चक्कर नहीं काटना पड़ेंगे। दूसरी प्री-लिटिगेशन यानि जो मामले अदालत तक नहीं पहुंचे हैं। प्री-लिटिगेशन के मामले सबसे ज्यादा हैं। इनकी संख्या जिले में 7209 है। इनमें से ज्यादातर मामले पहले भी लोक अदालतों में रखे जाते रहे हैं। हालांकि तब इन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, क्योंकि इनमें लोगों को सिर्फ सरचार्ज में ही माफी मिलने की संभावना रहती है। इससे पहले रखी गई लोक अदालत में कम ही लोग पहुंचे थे। प्रीलिटिगेशन वाले मामलों में बिजली कंपनी के 27 करोड़ 84 लाख रुपए बिजली कंपनी को इन बिजली उपभोक्ताओं से वसूल करना था। शनिवार को लगाई गई विशेष लोक अदालत से हजारों बिजली उपभोक्ताओं को मिला लाभ जिला न्यायालय में लगाई गई विशेष लोक अदालत में बिजली कंपनी के काउंटरों पर लोगों की जमा भीड़। ये केस वापस लिए जा रहे हैं ग्रामीण इलाकों में पंप कनेक्शनों में हुई बिजली चोरी व अन्य अनियमितताओं के केस, जो 30 जून 2018 तक दर्ज किए गए हैं। गांवों में घरेलू बिजली कनेक्शनों के केस इसमें शामिल नहीं किए गए हैं। संबल योजना के तहत जिन लोगों के मजदूरी कार्ड बने हैं या जो इस योजना में शामिल हुए हैं। इन सभी के बिल माफ करके दर्ज मामले वापस लिए जा रहे है। बिजली कंपनी ने वापस लिए मामले

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