कुलांस में आए उफान से 12 गांवों में फसलों को भारी नुकसान, सर्वे के लिए किसानों ने किया जल सत्याग्रह

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पिछले तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश से नदी-नालों के तटीय इलाकों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक नुकसान कुलांस नदी में आए उफान से हुआ है, इससे करीब एक दर्जन गांवों के किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भरने के बाद इसकी निकासी नहीं हो पा रही है जिससे पौधे में गलन का खतरा बढ़ गया है, कई जगह तो बहाव में पौधे ही उखड़कर बह गए हैं। गुस्साए किसानों ने बुधवार दोपहर को नारेबाजी की और नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। इसके बाद तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। किसानों की मांग थी कि फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाए।

सोमवार की रात को हुई तेज बारिश से मंगलवार सुबह कुलांस नदी में उफान आ गया था। नदी का पानी आसपास के गांवों में भर गया। नदी किनारे जो खेत थे उनकी फसलें तो पूरी तरह चौपट हो गईं। बताया जाता है कि नदी में आए उफान से करीब 12 गांवों की फसलों को नुकसान हुआ है।

मौके पर पहुंचे तहसीलदार : किसानों की फसलों को देखने तहसीलदार अमले के साथ कई गांवों में पहुंचे। तहसीलदार सुधीर कुशवाह ने बताया कि उन्होंने चार गांवों की फसलें देखीं। कई जगह जरूर पानी भरा है।

जिले में अब तक 79 सेमी औसत बारिश हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 54 सेमी था

कुलांस नदी में किसान उतर गए और फसलों के सर्वे की मांग को लेकर जल सत्याग्रह किया।

रामाखेड़ी जोड़ पर किसानों ने नदी में उतरकर की नारेबाजी

फसलों को हुए नुकसान पर रामाखेड़ी गांव के किसानों ने जमकर नारेबाजी की। बाद में ये सभी किसान कुलांस नदी के अंदर उतर गए और नारेबाजी करने लगे। इनका कहना था कि प्रशासन उनकी फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराए। करीब आधे घंटे तक यहां पर नारेबाजी की गई। रामाखेड़ी के उप सरपंच जगदीश मेवाड़ा ने बताया कि कुलांस में आए उफान से फसलें चौपट हो गई हैं। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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