खरीफ फसलों में कीट एवं पीला मौजैक का अटैक

0
471

जिले में मूंग, सोयाबीन, उड़द फसलों में पीला मौजैक एवं कीट व्याधि, गर्डल बीटल का प्रकोप शुरू हो गया है। कृषि विभाग ने खरीफ फसलें में कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएम शर्मा ने बताया कि पीला मौजैक एक वायरस जनित रोग है। फसलों पर रोग का फैलाव सफेद मक्खी (बेमिसिया खेसाई) द्वारा होता है। इस रोग में सर्वप्रथम गहरे पीले रंग के कुछ विसरिग चितकबरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो आकार में बढ़कर आपस में मिल जाते हैं, इस प्रकार पूरी पत्ती पीली हो जाती है और धीरे-धीरे पूरा पौधा ही पीला हो जाता है। इस रोग से ग्रसित पौधे में फूलों की संख्या कम हो जाती है और फलियां विकृत हो जाती है एवं इन फलियों में बने दाने कम संख्या में तथा सिकुड़े हुए होते हैं तथा उन पौधों में फूल एवं फलियां स्वास्थ्य पौधों की अपेक्षा कम लगते हैं। जो पौधे प्रारंभिक अवस्था में ग्रसित हो जाते हैं वह बिना कोई उपज दिए ही नष्ट हो जाते हैं। पीला मौजैक से प्रभावित पौधा प्रारंभिक अवस्था में उखाड़कर मिट्टी में गाड़ देना चाहिए। यह रोग वायरस से फैलता है तथा इस वायरस की कोई दवा नहीं है। ऐसी स्थिति में वायरस को फैलाने वाली सफेद मक्खी का नियंत्रण करने से ही पीला मौजैक से फसल को सुरक्षित किया जा सकता है।

खतरा

पीला मौजेक वायरस की नहीं है दवा, सफेद मक्खी पर नियंत्रण से बचाव संभव

यह उपाय करें किसान

सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए एमीडाक्लोप्रिड का 750 मिली प्रति हैक्टर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें अथवा ट्राइजोफास डेल्टामिथ्रिन दवा 500 मिली प्रति हैक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा थाइक्लोप्रीड 21.7 एससी 650 मिली हैं. निगरानी करते हुए तंबाखू की झल्ली अथवा बिहार की रोएंदार इल्ली के नियंत्रण के लिए बीटासायफ्लूथ्रिन इमिडाक्लोप्रीड 650 मिली है की दर से छिड़काव करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here