खाद में रेती, कीटनाशक में मिलावट देखी तो 30 गांवों के 700 किसानों ने पांच लाख इकट्ठा किए, 50 लाख बैंक से लोन लेकर बना ली कंपनी

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ढाबला हर्दू तराना के किसान कमल सिंह पंवार 2014 में डीएपी खाद लेकर आए तो देखा उसमें रेती मिली थी। सोयाबीन की फसल में इल्ली लगी तो बाजार से महंगा कीटनाशक खरीदा लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के किसानों से मिलकर खुद की कंपनी बनाने पर विचार किया। यह जिले की पहली ऐसी कंपनी है जिसे किसानों ने बनाया और उसका संचालन भी किसान ही कर रहे हैं। संचालकों का दावा है कि इसे मुनाफा कमाने के लिए नहीं खोला है। इसमें कोई व्यापारी नहीं हैं। सभी किसान हैं, जो समझते हैं कि किसानों को क्या चाहिए और कब चाहिए। उन्हें वह सब समय से पहले और गुणवत्ता का सप्लाय करने का प्रयास किया जाएगा। उच्चगुणवत्ता के कीटनाशक, खाद-बीज सप्लाय करने के लिए खोले स्टोर से खरीदारी करते किसान। राजस्थान के किसान भी देखने आ रहे किसानों की कंपनी की गतिविधियां देखने के लिए प्रदेश के साथ राजस्थान के किसान भी गांव में आ रहे हैं। पंवार ने बताया धार, झाबुआ, देवास, आगर-मालवा, राजगढ़ के साथ राजसमंद (राजस्थान) के किसान ढाबला हर्दू के साथ कंपनी के कार्यालय का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने भी अपने-अपने गांवों में इसी तरह की कंपनी शुरू करने की बात कही है। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने भी सराहा किसानों के प्रयास को नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने भी सराहा। हाल ही में नाबार्ड, भोपाल के मुख्य महाप्रबंधक एसके बंसल ने गांव का दौरा किया। उन्होंने कंपनी की जानकारी लेने के साथ किसानाें से चर्चा भी की। उन्होंने कहा-इसी प्रकार सामूहिक कार्य करने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। किसानों को चाहिए कि वे कंपनी में शेयर पूंजी को बढ़ाएं। ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ें। अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उपज भी बेचेंगे किसानों की कंपनी आने वाले समय में एक एकड़ जमीन खरीदेगी। इसमें वेयर हाउस बनाएगी। उच्च गुणवत्ता के उन्नत बीज तैयार कराएगी। जैविक इकाई की स्थापना करेगी। किसानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र भी शुरू किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की कृषि सामग्री उपलब्ध करवाएगी। साथ ही किसानों की उपज सीधे बहुराष्ट्रीय कंपनी को बेचने का काम भी करेगी। बार-बार समझाया, गांवों में बैठक ली तब माने किसान तीन साल में 30 गांवों के 700 किसानों ने पांच लाख रुपए इकट्ठे किए। बैंक से 50 लाख रुपए का लोन लिया और कालीसिंध फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बना ली। पंवार बताते हैं कि शुरुआत में किसान भी इसके लिए तैयार नहीं थे। दो-तीन बार लगातार चर्चा के बाद वे जैसे-तैसे माने। फिर लोन लेने में बड़ी परेशानी आई। इसके लिए ग्वालियर में कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया। बाद में कृषि, उद्यानिकी विभाग भी आगे आए। फिलहाल कंपनी का खुद का स्टोर है जहां से किसानों को गुणवत्ता के कीटनाशक, बिना मिलावट का खाद मिलते हैं। अगले साल सेे कंपनी किसानों को खुद का बीज सप्लाय करेगी। पंवार ने कहा-इसके लिए 10 क्विंटल बीज का प्रोग्राम (उन्नत बीज उत्पादन योजना के लिए कृषि विभाग से मानक बीज लेना) लिया है। उनका दावा है कि अगले साल 300 क्विंटल बीज तैयार हो जाएगा। जिसे किसानों को बाजार मूल्य से कम में सप्लाय करेंगे।

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