गीले कचरे से बना रहे जैविक खाद 20 रु. किलो में खरीद रहे किसान

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जिस कचरे को लोग घर से बाहर फेंक रहे थे उसे कचरे से अब खाद बनाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास किया जा रहा है। यह कार्य नगर पंचायत द्वारा संचालित एसएलआरएम सेंटर में किया जा रहा है। घरों से निकलने वाले कचरे को घर-घर संग्रहण के साथ-साथ इसका ट्रीटमेंट तो हो रहा है। सेंटर चलाने वाली महिलाएं इसका सदुपयोग करने के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही है।

सबसे खास बात यह है कि कचरे से बन रही खाद से महिलाएं पर्यावरण के प्रति जागरूकता का दायित्व भी पूरा कर रही है। शहर के प्रत्येक घर से संग्रहित होने वाले गीला और सूखा कचरा संग्रहण के दौरान साग-सब्जी, पत्ते, फल के छिलकों जैसे कचर से सेंटर मे वर्मी कंम्पोस्ट खाद का निर्माण किया जा रहा है। इन कचरों का सदुपयोग कर खाद बना रही महिलाओं द्वारा इसका विक्रय किया जा रहा है। हालंकि अभी इसका निर्माण कम मात्रा में हो रहा है।

डौंडी. एसएलआरएम सेंटर में जैविक खाद की पैकिंग करती महिलाएं।

डौंडी के सभी 15 वार्डों से एकत्रित कर रही कचरा

सखी महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष खुर्शीद सिद्धकी ने बताया कि उनके समूह में 20 महिलाएं है। 16 महिलाएं नगर के सभी 15 वार्डों में रिक्शा से कचरा संग्रहण और छंटाई कार्य में सहयोग करती है। उमा चौहान, शिवबती और जमुना बाई सेंटर में खाद निर्माण करती है। 20 रुपए किलो की दर पर डेढ़ माह में करीब 5 हजार रुपए का जैविक खाद की बिक्री कर चुके हैं।

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