ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों की पेंशन मंजूर नहीं हुई

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नई दिल्ली.  देश में लंबे समय से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के कर्मचारी अपनी पेंशन और अन्य मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले दिनों बैंक कर्मचारियों के संगठन के पदाधिकारी दिल्ली में वित्त मंत्री पीयूष गोयल से मिले थे। इसके बाद ये खबर चर्चा में है कि ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों को पेंशन के लिए मंजूरी दे दी गई है। इस खबर को कुछ पदाधिकारियों ने फोटो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर भी किया है।

दूसरी ओर,  मीडिया में प्रकाशित होने के बाद “रिटायरीज ऑफ रीजनल रूरल बैंक” के तुलसीराम सुनार और पीसी श्रीवास्तव ने इस खबर का खंडन किया है। सोमवार को भोपाल में तुलसीराम ने दावा किया कि ग्रामीण बैंक के विभिन्न कर्मचारी संगठनों में से किसी ने गलत जानकारी देकर ऐसी खबर फैलाई है और अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ जिसके आधार पर मान लिया जाए कि पेंशन मंजूर हो गई है। हालांकि, अभी तक सरकार या किसी अन्य संगठन की ओर से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है जिसमें मांगों के मानने या न मानने की बात कही गई हो।

 

तुलसीराम का दावा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को खबर लिंक मेल कर इसके बारे में पुष्टि करने का आग्रह किया है। तुलसीराम ने बताया कि यूनियन ऑफ इंडिया के खिलाफ 11 अलग-अलग लोगों के परिवाद दायर कर रखा है और सभी के अपने संगठन हैं। हो सकता है कि इन्हीं में से किसी ने ऐसी सूचना देकर खबर प्रकाशित कराई हो।

क्या है मामला ?
रिटायरीज ऑफ रिजनल रूरल बैंक के पूर्व कमर्चारी तुलसीराम और उनके जैसे 30 हजार रिटायरीज के साथ यूनियन ऑफ इंडिया और भारत सरकार से 1994 से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। इनकी मांग है कि ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों को भी कमर्शियल बैंकों की तरह वेतन, पेंशन के साथ 1994 से 2004 तक का एरियर मिले। इसके लिए तुलसीराम और अन्य संगठनों के लोगों ने वित्त मंत्री से दिल्ली में मुलाकात की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिए थे आदेश ?
25 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को कॉमर्शियल बैंक कर्मचारियों की तरह सुविधाएं और पेंशन दे। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और यूनियन ऑफ इंडिया को तीन माह का समय दिया था। जो वक्त अब समाप्त हो चुका है, लेकिन सरकार ने ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को अभी तक यह सुविधा नहीं दी। यह फैसला जस्टिस जोसफ कुरियन की तीन सदस्यीय बेंच ने सुनाया था।
हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में दिया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट के पहले कर्नाटक, राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस पर सरकार  ने अपना पक्ष रखा था। कहा था कि पेंशन हम भी देना चाहते हैं, लेकिन ग्रामीण बैंकों की वित्तीय हालत ठीक नहीं है इसलिए ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
क्या हैं मांगें 
रिटायरीज ऑफ रिजनल रूरल बैंक के एडमिन तुलसीराम की मांग है कि ग्रामीण बैंकों से रिटायर कर्मचारियों को कमर्शियल बैंक के कर्मचारियों की तरह वेतन और पेंशन दी जाए। साथ ही बकाया एरियर भी दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला सुना दिया है फिर सरकार देर क्यों कर रही है।

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