चुनावी साल में पीएम मोदी का बड़ा फैसला, कृषि उपज खरीद की गारंटी देगी सरकार

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नई दिल्ली। चुनावी साल में कृषि उपज की खरीद की गारंटी देने की तैयारी अंतिम दौर में है। इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा इसी महीने के अंत तक हो सकती है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि की घोषणा के बाद केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का भरोसा दिया है। खरीद मसौदे के तहत फसलों की सरकारी खरीद में राज्यों का दायित्व बढ़ाया जाएगा, जिसके लिए केंद्र राज्यों को वित्तीय सुरक्षा की गारंटी देगा।

फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी वृद्धि की घोषणा के बाद सबकी नजर उपज खरीद की गारंटी पर है। चुनावी साल में सरकार कृषि क्षेत्र की योजनाओं को जमीन पर लागू करने को लेकर पूरी तरह से सतर्क है। खरीफ सीजन की फसलों की एमएसपी की घोषणा के तत्काल बाद सरकारी खरीद की रुपरेखा बनाने का दायित्व मंत्रियों के समूह को सौंप दिया गया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित समूह ने अपनी तीन बैठकों के बाद ही रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिपोर्ट में खरीद के प्रारुप को गंभीरता से देखा और मसौदा तैयार करने में शामिल अफसरों के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक मसौदे में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया गया है। संशोधित मसौदे के मुताबिक तिलहन की खरीद को मध्य प्रदेश की भावांतर योजना की तर्ज पर तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि घरेलू जिंस बाजारों में तिलहन की एमएसपी पर बहुत कम बिक्री होती है। लिहाजा इसे भावांतर योजना के अधीन किया जा सकता है।

दलहन फसलों की पैदावार में निरंतर सुधार से बाजार को संभालना बहुत जरूरी माना गया है। दलहन आयात से मुक्ति पाने के लिए इसकी शत प्रतिशत खरीद को सुनिश्चित करने की तैयारी है। दलहन की फिलहाल होने वाली खरीद व्यवस्था को ही चुस्त दुरुस्त बनाने की योजना है। इसके तहत नैफेड के साथ कुछ और राज्य एजेंसियों को सक्रिय किया जा सकता है। राज्यों को खरीद का दायित्व सौंपे जाने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार उन्हें वित्तीय गारंटी देने को तैयार है।

एक अनुमान के अनुसार दलहन खरीद पर अधिकतम कुल लागत 50 हजार करोड़ रुपये की आ सकती है। इसके लिए बैंकों से उधार दिया जाएगा, जिस पर कुल पांच हजार करोड़ रुपये की ब्याज का बोझ पड़ेगा। इतनी ही धनराशि की जरूरत खरीद प्रबंधन पर आयेगी, जिसे केंद्र वहन करेगा। गेहूं और धान की खरीद का जिम्मा वैसे भी ज्यादातर राज्य सरकारें खुद उठा रही हैं। खाद्य सुरक्षा के लिए गठित बफर स्टॉक की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) करता ही है। इसकी घोषणा अगस्त के अंतिम सप्ताह में की जा सकती है।

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