परेशानी बनी भावांतर योजना, किसानों को नहीं मिल रही राशि

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-28 मई तक का भुगतान हुआ, लेकि न 29 मई से 9 जून तक का भुगतान लंबित

-मंडी पहुंच रहे कि सान, अधिकारियों से पूछ रहे- कब मिलेगा पैसा

देवास।

कि सानों को खुश करने के लिए सरकार ने भावातंर योजना शुरु तो कर दी लेकि न अब यही योजना सरकार का सिरदर्द बन गई है। कई कि सानों को उनकी उपज का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। यह राशि करोड़ों में है। परेशान कि सान रोज मंडी के चक्कर काट रहे हैं लेकि न मंडी प्रशासन कह रहा है कि हमारे हाथ में कु छ नहीं है, भोपाल से ही सब होगा। हालांकि कहा जा रहा है कि लगभग 3 करोड़ रुपए की राशि बुधवार को खातों में जमा की गई है।

जानकारी के मुताबिक सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं व चने की खरीदी की थी। जिन कि सानों ने समर्थन मूल्य पर चना बेचा था उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला है। सूत्रों के मुताबिक 28 मई तक का भुगतान तो हो चुका है लेकि न 29 मई से 9 जून तक का भुगतान बाकी है। अभी अगस्त चल रहा है। ऐसे में दो माह बीत चुके हैं लेकि न कि सानों को उनका रुपया नहीं मिल रहा। यह समस्या एक या दो कि सानों की नहीं बल्कि कई तहसीलों में है। कि सान मंडी आकर मंडी अधिकारियों से बात कर रहे हैं लेकि न वहां से यही जवाब मिल रहा है कि जब शासन से राशि आएगी तभी दी जाएगी। इसमें स्थानीय स्तर पर कु छ नहीं कि या जा सकता। दो दिन पहले भी सिरोल्या के कु छ कि सान मंडी पहुंचे और उन्होंने भावांतर की राशि जमा न होने की बात बताई। इस पर उन्हें भी यही जवाब दिया गया कि भोपाल से राशि आने के बाद दे दी जाएगी। इधर खरीदी की बात करें तो देवास जिले में अधिकांश जगहों पर सोसायटियों के माध्यम से ही खरीदी की गई थी जबकि देवास व सोनकच्छ में एफपीओ ने दो-दो कें द्र खोलकर खरीदी की थी। दोनों ही का करोड़ों रुपया अटका हुआ है। सोसायटियों की कु छ राशि तो बुधवार को जमा हो गई है लेकि न एफपीओ की राशि आना शेष है। ऐसे में यह राशि कब आएगी और कब कि सानों तक जाएगी, इस पर सवाल बना हुआ है।

भावांतर से परेशान हैं भाजपाई भी

भावांतर योजना की विफलता को लेकर कई बार बातें हो चुकी हैं। विपक्षी दल कांग्रेस तो इस योजना के बहाने सत्तारुढ़ भाजपा को घेरता आया है मगर अब खुद भाजपाई भी इस योजना के खिलाफ हैं। असल में मंगलवार रात को जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राके श सिंह देवास आए थे और चौधरी गार्डन में भाजपा की जिला बैठक व विधानसभावार बैठक ली थी तब ग्रामीण अंचल के कु छ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीड़ा बताते हुए कहा था कि भावांतर से नुकसान हो रहा है। कि सान परेशान हैं। इस योजना के भरोसे वोट नहीं मिल सकते। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष इस मामले में कु छ नहीं बोले। इस बारे में दबे स्वर भाजपा नेता कह रहे हैं कि यह योजना इसलिए भी विफल है क्योंकि अगर कि सानों को दो माह बाद भी उपज की राशि नहीं मिल रही है तो वह कहां जाएगा। वर्तमान में मंडी में चने का मूल्य 4400 रुपए चल रहा है। यदि कि सान अब मंडी में फसल बेचता तो उसे हाथों हाथ राशि मिल जाती और खेती-कि सानी सहित घर-परिवार के काम प्रभावित न होते।

मंडी समिति की भूमिका नहीं

मंडी सचिव जेके चौधरी ने कहा कि यह बात सही है कि चने का पैसा अब तक नहीं मिला है लेकि न इसमें मंडी समिति का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यदि व्यापारी से जुड़ा मामला होता तो हम जरुर भुगतान करवा देते। हमारे पास आएदिन कि सान आकर परेशानी बताते हैं। हम सोसायटियों में फोन करके जानकारी लेते हैं और वहां से जो जवाब मिलता है वह कि सान को देते हैं। राशि भोपाल से ही जारी होगी।

तीन करोड़ का भुगतान हुआ प्राप्त

जिला प्रबंधक सहकारिता के एन त्रिपाठी ने बताया कि जिला विपणन अधिकारी को मार्फेड से करीब साढ़े तीन करोड़ का भुगतान प्राप्त होना शेष है। बुधवार तक तीन करोड़ के करीब भुगतान प्राप्त हुआ है। वह खातों में जमा करवा दिया है। जो भुगतान शेष है वह एक सप्ताह तक जमा हो जाएगा। देवास में एफपीओ ने खरीदी की है। उसका पेमेंट वहीं से होगा।

पत्र व्यवहार कर रहेे

उप संचालक कृषि एसएस राजपूत ने बताया कि पोर्टल पर कु छ कि सानों की इंट्री छूट गई थी। भोपाल से इंट्री की परमिशन लेनी होगी। समर्थन मूल्य पर सोसायटियों ने खरीदी की थी। एफपीओ ने देवास व सोनकच्छ में दो-दो खरीदी कें द्र खोले थे। दोनों का भुगतान बाकी है। शासन से जैसे ही राशि आएगी तो कि सानों को भुगतान कर दिया जाएगा। हम इस बारे में लगातार पत्र व्यवहार कर रहे हैं।

 

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