बारिश ने फसल को दिया जीवन पर बाढ़ से नदी किनारे के खेत रेत से पटे

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सप्ताहभर से जिले में हो रही झमाझम बारिश के चलते 12 अगस्त को जिले में बाढ़ आ गई थी। बारिश रुकी तो नहीं, लेकिन कम जरूर हुई, जिसके चलते बाढ़ का पानी उतर गया। बारिश ने जिले में धान की फसल को जीवनदान दिया, लेकिन बाढ़ ने नदी किनारे के खेतों को रेत से पाट दिया। इससे नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को नुकसान हुआ है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी बारिश जारी है, जिसके चलते नुकसान का आंकलन नहीं हो पाया है। बाढ़ ने जिले में सड़कों तथा पुल-पुलियों को भी नुकसान पहुंचाया है।

बारिश के चलते बाढ़ आने से नदियों का पानी आसपास के खेतों में घुस गया। खेतों की मेड़ टूट गई। बाढ़ का पानी अपने साथ नदियों की रेत लेकर आया था, जो खेतों में ही पट गई है। भानुप्रतापपुर के ग्राम अलवर के किसानों ने बताया गांव में लगभग 7 एकड़ फसल रेत पटने से बर्बाद हुई है। बांसला में लगभग 12 एकड़ धान फसल रेत पटने से खराब हुई। नदी किनारे बसने वाले प्राय: गांवों की यही कहानी है। ग्राम पंचायत सोनेकन्हार के आश्रित ग्राम अलवर से आसुलखार मार्ग में नदी पर बना पुल बाढ़ के कारण टूट गया। इससे स्कूली बच्चों व राहगीरों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीण छोटेलाल उयके, ओमप्रकाश, अजय नरेटी, राधेलाल उयके ने बताया इसी रास्ते से बच्चे स्कूल कनकपुर व आसुलखर जाते हैं। पुल टूट जाने से पांच गांवों का संपर्क भी टूट गया है। मोहगांव हल्बापारा से स्कूलपारा सड़क भी कट जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। बांसला से इमलीमोड मुख्य सड़क से डामर भी उखड़ गई है।

धान के लिए बारिश वरदान, सब्जी की फसल को होगा नुकसान: कृषि वैज्ञानिक बीरबल साहू ने बताया सप्ताहभर से जिले में हो रही बारिश धान के लिए वरदान है। केवल सब्जी की फसल को इससे नुकसान होगा। साथ ही नदी किनारे के खेत जहां बाढ़ का पानी घुस गया था वहां रेत पटने से नुकसान होगा। नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को इसका खतरा हमेशा होता है।

भानुप्रतापपुर। बाढ़ के चलते ग्राम अलवर का पुल टूटने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा।

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