बीमा राशि वितरण में विसंगति: किसान ने कहा- प्रशासन कर रहा लापरवाही

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मंगलवार को एसडीएम कार्यालय में भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नाम किसानों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन एसडीएम प्रियंका गोयल को सौंपा। ज्ञापन में किसान संघ ने प्रशासन पर फसल बीमा राशि के वितरण में विसंगति के आरोप लगाए हैं। संगठन ने बताया जो बीमा राशि डाली जा रही है, उसमें अनेक विसंगतियां सामने आ रही हैं। जिससे यह लग रहा है कि प्रशासन इस काम में लापरवाही बरतने कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। अब किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों को बीमा कंपनियां 100 रुपए प्रति एकड़ बीमा राशि दी जा रही है। वहीं टिमरनी तहसील के कुछ गांवों में किसानों के नाम ही बीमा राशि सूची में नहीं है। यह किसानों के साथ छलावा है और इसमें स्थानीय प्रशासन की लापरवाही उजागर हो रही है।

न मिले 3 हजार से कम राशि

संगठन ने इस मामले में जांच कराकर किसानों को अधिक से अधिक बीमा राशि दिलाने मांग की है। साथ ही यह भी कि किसी भी किसान को 3 हजार रुपए से कम बीमा राशि नहीं दी जाए। इस बात का ध्यान रखा जाए। जिन किसानों को 3 हजार रुपए बीमा राशि दी गई है, उन्हें आरबीसी 6/4 के तहत मुआवजा राशि भी दी जाए।

नहीं दी पंचनामे की प्रति

संघ ने बताया अानावारी करते समय ग्राम पंचायत और संगठन को पंचनामे की प्रति नहीं दी। साथ ही स्थल निरीक्षण पंचनामा भी नहीं बनाया है। स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के नतीजन आज अन्नदाताओं के लिए बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन रहा है।

800 रुपए प्रति क्विंटल मिले प्रोत्साहन राशि

संगठन ने ग्रीष्मकालीन मूंग फसल को लेकर बिल अनुसार किसानों को 800 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि शीघ्र दिए जाने मांग की है। वर्तमान में खरीफ फसल बिक्री के पंजीयन को लेकर संगठन ने ओटीपी सिस्टम बंद किए जाने की मांग की है। संगठन ने कहा पंजीयन में जिला सहकारी बैंक खाता और एक ही मोबाइल नंबर से सिर्फ एक ही किसान के पंजीयन की बाध्यता खत्म की जाना चाहिए। पंजीयन के लिए सिर्फ एक ही राष्ट्रीयकृत बैंक का खाता बाध्य किया जाए। वही संगठन ने पिछले वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के शेष रहे भुगतान को शीघ्र दिलाए जाने और इस वर्ष के गेहूं, चने की फसल के शेष भुगतान और बोनस राशि शीघ्र दिलाने मांग की है। ज्ञापन देने वालों में प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य नरेंद्र दोगने, श्याम पाटिल, परमानंद दोगने, मनोहरसिंह कलम, रामकृष्ण तोमर, दिनेशसिंह सिंधा, मुरलीधर छलोत्रे, शैतानसिंह राजपूत, रामशंकर पटेल आदि मौजूद थे।

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