मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में होगी काजू की खेती

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बैतूल।मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में जल्द ही काजू की खेती की जाएगी। इसकी तैयारी हो गई। प्रयोग के तौर पर पहले 150 हेक्टेयर जमीन पर फसल बोई जाएगी। अफ्रीका से काजू का बीज मंगाया गया है। बैतूल प्रदेश का पहला जिला होगा जहां काजू उत्पादन इतने बड़े पैमाने पर सुनियोजित तरीके से शुरू किया जाएगा। काजू संचालनालय के डायरेक्टर डॉ. वेंकटेश ने जिले का तीन दिवसीय दौरा कर तैयार की रिपोर्ट में यह बात कही है। डॉ. वेंकटेश ने उद्यानिकी विभाग की उपसंचालक डॉ. आशा उपवंशी के साथ जिले में तीन दिन तक भ्रमण किया था।

डॉ. वेंकटेश ने बताया कि बैतूल में काजू की वेंगरूला- 47 प्रजाति जलवायु को सूट करती है। इसे लगवाने का प्रयास किया जाएगा। भारत सरकार ने अफ्रीका से काजू की प्रजातियों के बीज मंगाने की तैयारी की है। यह बीज आता है तो इसे किसानों को उपलब्ध करवाया जाएगा। जिले में काजू की खेती की भरपूर संभावनाएं हैं। किसान अपनी वेस्ट लैंड पर भी काजू उत्पादन कर सकते हैं। फिलहाल, 150 हेक्टेयर जमीन पर काजू की खेती करने का टारगेट तय किया गया है।

वर्तमान में तीन विकासखंडों घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली में ही काजू की खेती होती है। यहां काजू उगाने वाले किसानों से भी डॉ. वेंकटेश ने मुलाकात की। डॉ. वेंकटेश ने बताया कि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध रत्नागिरी में भी हापुस और अल्फांसो आम की जगह काजू का उत्पादन किसान कर रहे हैं। काजू उत्पादन से वे लाखों रुपए कमा रहे हैं। अनुपजाऊ जमीनों से भी वे बेहतर आमदनी कर रहे हैं। उपसंचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी ने बताया कि महाराष्ट्र के काजू उत्पादक किसानों को लाकर बैतूल के किसानों को काजू उत्पादन का प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।

अभी आठ प्रदेशों में होती है खेती

काजू का मूलस्थान ब्राजील है, जहां से 16वीं सदी के उत्तरार्ध में उसे वनीकरण और मृदा संरक्षण के प्रयोजन से भारत लाया गया। देश के पश्चिमी और पूर्वी समुद्र तट के आप-पास के आन्ध्रप्रदेश, गोवा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओड़िशा, तमिलनाडू और पश्चिम बंगाल में खेती होती है। इसके अलावा असम, छतीसगढ़, गुजरात, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा के कुछ इलाकों में भी काजू की खेती की जाती है।

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