रात होते ही खेतों में घुस रही नीलगाय व जंगली सुअर, फसलें कर रहे तबाह, किसान बोले- भगाने जाओ तो मारने दौड़ते हैं

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भैरव डूंगरी के पास एक किसान के खेत में जंगली जानवरों ने ऐसे गड्ढा खोदकर फसल चौपट कर दी।

समस्या एक-दो दिन नहीं, बल्कि महीनों से है

जंगली जानवरों के खेतों में घुसने से परेशान किसानों ने बताया यह समस्या एक-दो दिन नहीं, बल्कि एक-दो महीनों से है। जानवरों ने खेत में घुसने की अब आदत-सी बना ली है। भयभीत इसलिए भी हैं कि यदि इन्हें भगाने के चक्कर में जानवरों ने किसी ग्रामीण पर ही हमला बोल दिया तो उसका क्या होगा। वन विभाग चाहे तो एक योजनाबद्ध तरीके से इन्हें पकड़ सकता है, या इन्हें खेतों से दूर रख सकता है, लेकिन शिकायतों के बाद भी ऐसा किया नहीं जाता। जिला प्रशासन के जिम्मेदार भी आर्थिक सहायता के मुद्दे पर पल्ला झाड़ लेते हैं।

डिप्टी रेंजर बोले: जंगल खत्म हो गया, एकदम नहीं रोक सकते जानवरों को

भास्कर ने मामले में एडीएफओ राकेश लहरी से चर्चा करना चाही, पर उनसे संपर्क नहीं हुआ। शाजापुर अनुभाग के डिप्टी रेंजर अशोक सिंह बघेल चर्चा में बोले विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन इलाकों में जंगली जानवरों के खेतों में घुसने की शिकायतें आ रही हैं, वहां व जिले में जंगल खत्म ही हो गया है। हम भी एकदम से इन जानवरों को कैसे रोकें। किसान लंबी ऊंचाई पर कुछ साफ तरीके से दिखने वाले पुतले खेतों में लगाएं। रोजड़े दूर रखने के लिए बदबू मारने वाला एक पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या बताकर कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन लेंगे। पीड़ित किसान लोकसेवा गारंटी के जरिए आवेदन करें। सत्यापन करके राजस्व विभाग से मुआवजा दिलाया जाएगा। मामले में एसडीएम यू.एस. मरावी से भी चर्चा करना चाही, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

यहां के किसान ज्यादा परेशान

जिला जेल रोड पर ही जेल से आगे स्थित भैरव डूंगरी के आसपास दर्जनभर से ज्यादा खेत हैं। नारायणसिंह परमार का खेत भी यही हैं। उन्होंने बताया तीन-चार दिन पहले रोजड़े व जंगली सूअर रात में घुसे और सोयाबीन व धनिये को नुकसान पहुंचा गए। सुरक्षा के लिए लगाई लंबी पन्नियां व डंडियां तक इन्होंने तोड़ दी।

एक अन्य खेत के मालिक मकसूद अली ने 10 बीघा में सोयाबीन बोई है। वह बोले जंगली जानवरों ने जड़ फली खाने के लिए खेत में इस तरह गड्ढा खोद डाला, जैसे किसी ने खेत हांका हो। करीब 2 बीघा फसल प्रभावित हुई है। 20 दिन पहले भी खेत में चार-पांच जगह जानवर घुसकर फसलों की जड़ें खाने गड्ढे खोद गए थे। शाजापुर, गिरवर, पतौली आदि क्षेत्रों के 50 से ज्यादा खेत हमारे इस एरिया में हैं। जानकारी मिली है कि लगभग हर जगह जंगली जानवरों से थोड़ा-बहुत नुकसान हुआ है।

टुकराना के रामनारायण ने चार बीघा में मूंगफली बोई है। हाल ही में उनके यहां भी जानवरों ने घुसकर कई जगह मूंगफली उखाड़कर नुकसान पहुंचाया। किसान कुछ कर पाता, उससे पहले जानवरों ने खेत में हमला बोल डाला। इसी गांव के ऊंकार माेदी द्वारा 10 से 12 बीघा खेत में लगाई सोयाबीन का कुछ हिस्सा जंगली सूअर व रोजड़े खेतों में घुसने से प्रभावित हो गया।

गिरवर के प्रेमसिंह के अनुसार सोयाबीन सहित कुछ सब्जियों की फसल लगा रखी है। रोजड़े व जंगली सूअर अमूमन हर रात खेत में घुस रहे हैं। कभी जड़ें खाते हैं तो कभी फसलों की पत्तियां या फूल। काफी परेशान हैं। जानवर भगाने जाएं तो उल्टा हम पर हमला करते हैं। हम जल्द ही जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग करेंगे कि किसानों की इस समस्या के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

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