MP – सब्सिडी का खेल रोकने एक पोर्टल पर आएंगे कृषि और उद्यानिकी विभाग

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भोपाल। प्रदेश में हर साल एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा सब्सिडी विभिन्न् सामग्रियों पर देने वाले कृषि और उद्यानिकी विभाग अब एक पोर्टल पर आएंगे। ऑनलाइन आवेदन होंगे और स्वीकृत होने की सूचना भी एसएमएस से मिलेगी। ओटीपी के साथ अधिकृत डीलरों की सूची मिलेगी।

किसान जहां से चाहे मोलभाव करके सामग्री खरीदेगा और उसका बिल पोर्टल पर अपलोड करेगा। विभाग की ओर से सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन में नियमानुसार चीजें मिलीं तो सीधे उपभोक्ता के खाते में सब्सिडी की राशि का भुगतान हो जाएगा। उसे किसी दफ्तर में चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह व्यवस्था प्रदेश में अगले रबी सीजन से लागू हो जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक उद्यानिकी विभाग द्वारा पॉलीहाउस के निर्माण पर दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर काफी समय से शिकायतें मिल रही हैं। भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने तो इसको लेकर विधानसभा में मुद्दा भी उठाया था। तब विभाग ने कार्यवाही करते हुए 12 पॉलीहाउस कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया और कुछ वसूली भी की। सिसोदिया ने इंदौर और उज्जैन संभाग में बड़े पैमाने पर सब्सिडी के लालच में गड़बड़ी करने की बात उठाई है। उन्होंने कहा था कि कंपनियां आधा-अधूरा काम छोड़कर भाग जाती है।

निर्माण भी गुणवत्ताहीन हो रहा है। आगर मालवा में सब्सिडी के लिए आवेदन में फर्जीवाड़ा करने का मामला भी सामने आ चुका है। इसी तरह ड्रिप स्प्रिंकलर सिस्टम में भी फर्जीवाड़े के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ इसी तरह के मामले कृषि विभाग में पिछले साल सामने आए थे। मैदानी अधिकारियों ने मिलीभगत करके खाद, बीज सहित अन्य उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी किसानों को देने की जगह हजम कर गए थे।

आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में गड़बड़ी प्रमाणित पाई गई तो कृषि विभाग ने उप संचालकों को निलंबित करने के साथ विभागीय जांच भी शुरू कर दी और ऑनलाइन पोर्टल बनाकर इस खेल में काफी हद तक रोक लगा दी। अब यही प्रयोग उद्यानिकी विभाग में लागू करने की तैयारी हो गई है।

ड्रिप स्प्रिंकलर में 300 करोड़ की सब्सिडी

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई के लिए पानी का बेहतर उपयोग करने ड्रिप स्प्रिकंलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। हर साल लगभग तीन सौ करोड़ रुपए की सब्सिडी किसानों को दी जाती है। इसी तरह अन्य योजनाओं में भी लगभग एक हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाती है।

आशय पत्र देने की व्यवस्था खत्म

एकीकृत पोर्टल व्यवस्था लागू होने के बाद उद्यानिकी विभाग सब्सिडी के प्रकरण स्वीकृत होने पर आश्ाय पत्र नहीं देंगे। किसान को ऑनलाइन ही सारी सूचनाएं मिलेंगी। सब्सिडी की राशि सीधे किसान के खाते में जमा होगी। निर्माता कंपनियों से वो मोलभाव कर खुद सामग्री लेगा। सूत्रों का कहना है कि सब्सिडी के चक्कर में अधिकृत विक्रेताओं ने कीमतें बढ़ाकर रखी हैें। जब मोलभाव होगा तो इसमें भी अंतर आएगा।

बिल लगाया और हो जाएगा भुगतान: डॉ.राजौरा

प्रमुख सचिव कृषि, उद्यानिकी डॉ.राजेश कुमार राजौरा ने बताया कि अगले रबी सीजन से कृषि, उद्यानिकी और कृषि अभियांत्रिकी की योजनाएं को लेकर एकीकृत पोर्टल व्यवस्था लागू की जाएगी। किसानों से विभिन्न् योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। प्रकरण स्वीकृत होने पर किसान को एसएमएस से प्रकरण स्वीकृति की सूचना और डीलर की सूची भेजी जाएगी। इसके आधार पर वो जहां से चाहे सामग्री ले सकेगा। इसमें विभागों का हस्तक्षेप को पूरी तरह से दूर रखा जाएगा।

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