हजारों हेक्टेयर खेत लबालब, सोयाबीन व तिली गली, कटने के लिए तैयार उड़द की फसल नष्ट

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जिले में बारिश का दौर रविवार को थमने पर अपने खेतोंं पर पहुंचे किसानों को अपनी महीनों की मेहनत और अरमानों पर पानी फिरता नजर आया। इलाके में खेत के खेत तालाब में तब्दील होने से खरीफ फसलें डूब गई है। जिले के श्योपुर, बड़ौदा और मानपुर क्षेत्र में 22 गांव के भराव क्षेत्र में खेतो में पानी भरने की समस्या ज्यादा है। इन गांव की हजारों हेक्टेयर रकबे मे पानी भरने के कारण सोयाबीन और तिली गलने की आशंका निर्मित हो गई है। जबकि पकने की स्टेज पर बारिश की मार से उड़द की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।

कराहल और विजयपुर तहसील में बाजरे की फसल में भी खराबा हुआ है। किसानों का कहना है कि पांच दिन से पर्याप्त धूप नहीं मिलने की वजह से खेतों में खड़ी सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसल के पत्ते पीले पडकर गलने लगे हैं। सबसे ज्यादा उड़द की फसल को 80 फीसदी तक नुकसान किसान बता रहे हैं। भारी बारिश से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे की मांग किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से की है। इस संबंध में रविवार को विजयपुर विधायक रामनिवास रावत ने मुख्यमंत्री को फैक्स संदेश भेजकर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है। वहीं श्योपुर विधायक दुर्गालाल विजय ने कलेक्टर से मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे के लिए राजस्व दल गठित कर इलाके में नुकसान का सर्वे कराने का आग्रह किया है। कलेक्टर सौरभ सुमन ने जल्द स्थिति का जायजा लेकर शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है। उधर विपरीत मौसम से खरीफ फसलों में कीट प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि महकमा भी सावधान हो गया है। उप संचालक पी गुजरे का कहना है कि खेतों में पानी भरने से अधिक नमी के चलते सोयाबीन , उड़द व मूंग में पीला मोजेक रोग की रोकथाम के उपाय किसानों को बताने के लिए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को मैदानी भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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