2 से 5 क्विं. प्रति एकड़ निकल रही सोयाबीन दाम कम मिलने से लागत भी नहीं निकल रही

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Oct 02, 2018

किसानों ने खरीफ सीजन की सोयाबीन फसल निकाल ली है। खेतों में प्रति एकड़ करीब 2 क्विंटल से 5 क्विंटल तक उपज निकल रही है। इससे किसानों की लागत ही नहीं निकल पा रही है। वहीं मंडी में भी उपज के उचित दाम नहीं मिल पाने से किसान चिंता में है। कम दाम में उपज बिकने से किसानों की लागत ही नहीं निकल पा रही है। सोमवार को कृषि उपज मंडी में 6 हजार क्विंटल आवक रिकार्ड की गई। इसमें से करीब 5 हजार क्विंटल सोयाबीन किसानों ने बेचा।

कर्ज में दबे किसानों को सोयाबीन की फसल से इस साल भी फायदा नहीं हुआ है। हालत यह है कि करीब डेढ़ माह पहले सोयाबीन की फसल में तना छेदक रोग लग गया था। इसके बाद पीला मोजेक रोग ने फसलों को बर्बाद कर दिया। इन रोगों से सोयाबीन फसल की फली के दानों की ग्रोथ नहीं हो सकी। इसके बाद जैसे-तैसे फसल पकी तो कटाई के दौरान बारिश से खेत में कटी फसल भीग गई। इससे भी किसानों को काफी नुकसान हुआ।

किसानों को दी गई थी सलाह: पीला मोजेक और तना मक्खी के प्रकोप के दौरान किसानों ने कई बार कलेक्टोरेट व कृषि विभाग के अधिकारियों को शिकायत की। शिकायतों के बाद कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी खेतों में रोगों को देखने भी पहुंचे। इस दौरान उचित दवाओं के छिड़काव की भी सलाह दी लेकिन यह कोई काम नहीं आई। वहीं फल्ली के दानों में भी ग्रोथ नहीं हो पाई। इससे दाना कमजोर निकल रहा है। इस संबंध में किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने जो सलाह दी थी वह भी काम नहीं आई।

बारिश में भीगा दाना हुआ दागदार, मिल रहा कम भाव: सेवनिया के किसान राम सिंह परमार ने बताया कि कटाई के दौरान अचानक बारिश हो गई थी। इससे खेतों में कटी फसलों के भीग जाने से दाना दागदार हो गया। इससे भीगे हुए सोयाबीन का दाम कम मिल रहा है। फसल का उत्पादन भी बहुत कम हुआ है।

6 हजार क्विंटल हुई आवक: मंडी सचिव करुणेश तिवारी ने बताया कि सोयाबीन की आवक शुरु हो गई है। सोमवार को करीब 5 हजार क्विंटल सोयाबीन की उपज किसानों ने बेची। कुल आवक 6 हजार क्विंटल रिकार्ड की गई है।

3175 तक बिकी सोयाबीन, मंडी में 6 हजार क्विंटल हुई आवक

नहीं निकल रही लागत

सीलपुरी गांव के मनोहर मन्नू सूर्यवंशी ने बताया कि उन्होंने 12 एकड़ जमीन पर सोयाबीन की फसल बोई थी। इसमें करीब 22 क्विंटल सोयाबीन की फसल हुई है। मंडी में 2420 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से सोयाबीन नीलाम हुई है। जबकि बोवनी कटाई में 16 हजार, 15 हजार दवाई और 27 हजार की सोयाबीन खरीदकर बोवनी की थी। कुल लागत 58 हजार रुपए की है। इससे काफी नुकसान हुआ है।

तीन साल से हो रहा नुकसान

जिले के किसान पिछले तीन साल से सोयाबीन की फसल से लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में लगातार कर्ज में दबते जा रहे हैं। कर्ज से परेशान कई किसानों ने पिछले साल मौत को गले लगाया था।

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