35 हजार हेक्टेयर की सोयाबीन फसल दागी, फिर भी बीमा क्लेम नहीं मिलेगा

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शाजापुर | Sep 27, 2018

एक माह पहले पीला माेजेक और फसल कटाई के दौरान हुई बारिश ने जिले की 35 हजार हेक्टेयर रकबे में बोई सोयाबीन फसल को खराब कर दिया। कटी पड़ी इस फसल में 30 प्रतिशत तक नुकसान हो गया। इधर, पीला मोजेक (बीमारी) के कारण समय से पहले फसल सूखने के कारण पहले ही दाना छोटा रह गया। इससे 50 फीसदी फसल प्रभावित होगी। इसके बाद भी ज्यादातर किसान बीमा कंपनी को शिकायत नहीं कर सके। निर्धारित 72 घंटे के अंदर उन्होंने कई बार कंपनी को फोन लगाने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इधर, राजस्व भू-अभिलेख द्वारा क्राॅप कटिंग के माध्यम से नुकसानी व उत्पादन का आकलन करने वाले पहुंचे ही नहीं। भू-अभिलेख अधीक्षक ने कबूला कि उक्त हलके में नुकसानी आदि का आकलन नहीं हो पाने के कारण संबंधितों को बीमा आदि का फायदा भी नहीं मिल सकेगा।

जिले में साेयाबीन फसल कुल 2 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई गई है। ज्यादातर किसानों ने पहली बारिश में ही बुआई कर दी थी। इस कारण फसल जल्दी तैयार हो गई और कटाई शुरू हो गई। इसी बीच 21 सितंबर को बारिश हो गई। उस वक्त करीब 35 हजार हेक्टेयर की फसल कटकर खेतों में पड़ी थी। तीन दिन की बारिश से खेताें में पड़ी फसल अंकुरित होने लगी। किसानों ने कटी पड़ी फसलों की ढेरियों को सुखाने का प्रयास भी किया। काफी मशक्कत के बाद इकट्ठे कर खलिहान लाए, लेकिन यहां थ्रेशर से निकलने वाले दाने चमक विहीन और दागी हो गए। बेदारनगर निवासी किसान जुझारसिंह परमार ने कहा फसल को खराब होते देख कंपनी के टोल फ्री नंबरों पर संपर्क करने किया। कई बार डायल करने पर भी संपर्क नहीं हो सका। मदाना निवासी सवाईसिंह की कंपनी अधिकारी से बात जरूर हुई। उन्होंने अवलोकन करने का भरोसा दिलाया, लेकिन अब तक कोई नहीं पहुंचा। ऐसे में खेतों में पड़ी फसल को खलिहान में लाकर थ्रेशर से निकाल ली। अब वे सर्वे कैसे करेंगे।

भू-अभिलेख अधीक्षक एच.एस. नामदेव का कहना है क्राॅप कटिंग के लिए हमने सभी पटवारियों को करीब डेढ़-दो माह पहले ही किसानों की नामवार सूची दे दी थी। यदि किसी पटवारी ने किसानों को फसल कटाई हो जाने तक सूचना नहीं दी है तो कार्रवाई होगी। उक्त हलके में नुकसानी आदि का आकलन नहीं हो पाने के कारण संबंधितों को बीमा आदि का फायदा भी नहीं मिल सकेगा।

पीला मोजेक का असर

90 दिन में पकने वाली फसल 65 दिन में पीली पड़कर सूखी

पीला मोजेक बीमारी के कारण सोयाबीन फसल पहले ही प्रभावित हो गई थी। 90 दिन में पकने वाली फसल 60 से 65 दिन में ही पीली पड़कर सूखने लगी। इस कारण फसल का सही तरीके से दाना नहीं बना। दाना छोटा होने कारण प्रभावित क्षेत्रों की सोयाबीन फसल पहले से ही 20-25 प्रतिशत तक डेमेज हो चुकी है।

फसल कटने के बाद आया अफसर का फोन

फसलों में होने वाले नुकसान से लेकर औसत उत्पादन तय करने के लिए भू-अभिलेख ग्वालियर द्वारा चिह्नित प्रत्येक हलके के 4-4 प्लॉट लेेने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। फसल कटाई होकर थ्रेसिंग हो जाने तक चिह्नित प्लॉट वाले खेत पर जिले से राजस्व का अमला ही नहीं पहुंचा। ऐसा ही ग्राम मोदीपुर में हुआ। यहां के ग्वालियर मुख्यालय द्वारा ग्राम मोदीपुर निवासी नरेंद्रसिंह मकवाना के खेत से प्लॉट लेकर क्राॅप कटिंग करने के लिए चिह्नित किया गया। करीब डेढ़-दो माह पहले से ऑनलाइन आई इस सूची का अवलोकन अफसरों ने किया ही नहीं। दो दिन पहले किसान को राजस्व अफसरों ने फोन लगाकर उनके खेत से क्राॅप कटिंग के लिए प्लॉट लेने की सूचना दी, जबकि किसान ने फसल कटाई कर थ्रेसिंग भी कर ली।

सड़ने लग गई सोयाबीन

…और पूरी फसल के हाल

एक बीघा से सिर्फ 50 किलो तक उत्पादन, कीमत पर होगा असर

ग्राम दुहानी के राधेश्याम जाट, साजोद के सीताराम परमार, दुहानी के कमल गुर्जर ने बताया फसल कटने के बाद हुई बारिश के कारण फसल 25-30 प्रतिशत तक खराब हुई। पतली जमीन पर खड़ी फसल की भी चमक खत्म हो गई है। इससे दाम नहीं मिल सकेगा। ग्राम सतगांव के ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया 8 बीघा की फसल कटी पड़ी थी, जो दागी हो गई। अब बेचने के लिए भी माथापच्ची करना पड़ेगी।

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