5 गांव के 350 कि सानों ने कहा- बीमा योजना के तहत हुआ मजाक

0
473

जिले के 5 गांव के कि सान पिछली खरीफ फसल सोयाबीन का फसल बीमा नहीं मिलने से परेशान हो गए हैं। कई लोगों का नुकसान तो भारी भरकम हुआ, लेकि न कृषि विभाग और राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं में इन कि सानों को न के बराबर बीमा धन मिला है। इन लोगों ने कलेक्टर से लेकर कृषि विभाग के सामने गुहार लगाई है। साथ ही राजस्व विभाग के पटवारी से लेकर अन्य स्तर पर लापरवाही की गई है उसको लेकर उच्च स्तर पर भी शिकायत की गई है। हालात ये हैं कि 5 गांव के करीब 350 से अधिक कि सान आर्थिक रूप से हुए नुकसान से मानसिक रूप से भी परेशान हो गए हैं। दरअसल फसल कटाई पद्धति में की गई लापरवाही का नतीजा है कि फसल बीमा होने के बावजूद फसल के बर्बाद होने पर कोई मदद नहीं मिल पाई है।

धार के समीपस्थ ग्राम पिंजराया, चिड़ावत, छापर, कराड़िया और बेरछा गांव के करीब 900 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की फसल को लेकर परेशानी आई थी। इस क्षेत्र के करीब 350 कि सानों की फसलों का नुकसान हुआ था। कि सानों ने इस बारे में बताया कि उनके क्षेत्र में फसल नुकसानी की शिकायत करने पर विशेष रूप से जो कार्य होना था वही नहीं कि या गया। नुकसानी के अवलोकन के लिए फसल कटाई पद्धति के नाम पर खानापूर्ति की गई। कि सानों ने बताया कि उनको शिकायत करना महंगा पड़ गया। क्योंकि राजस्व विभाग के मैदानी अधिकारियों का कहना था कि हमारी शिकायत की है इसलिए अब हम फसल बीमा और मुआवजे के मामले में परेशानी होगी। कि सानों ने बताया कि जिस तरह से हमें चेतावनी दी गई थी, वही हुआ। हम कि सानों ने तो के वल अपनी समस्याएं सीएम हेल्प लाइन आदि स्थानों पर पहुंचाई थी लेकि न हमें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना हमारे लिए घातक हो जाएगा। फसल कटाई के नाम पर सोयाबीन के उन पौधों का चयन कर लिया जिनमें फली लगी हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को शिकायत करना इस तरह से महंगा पड़ता है तो फिर व्यवस्था ही क्यों बनाई गई है। पांच गांव के सैकड़ों कि सान अपनी इस पीड़ा के लिए तीन दिन पहले आवेदन भी दे चुके हैं। कलेक्टर से लेकर कृषि विभाग के उपसंचालक को अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन दिया है। वहीं कि सानों ने कहा है कि हमें 70 प्रतिशत की हानि होने पर भी 0 प्रतिशत हानि के तौर पर लिया गया है। कि सानों ने मांग की है कि एक बार फिर पूरी प्रक्रिया की पड़ताल करवाया जाए और बीमे का लाभ दिलवाया जाए। वहीं राजस्व विभाग के जिन कर्मचारियों ने यह काम कि या है उन पर भी कार्रवाई की जाए।

इस बारे में कृषि विभाग के उपसंचालक एस जमरा ने बताया कि कि सानों की शिकायत उन्हें मिली है। उन्होंने कलेक्टर को भी शिकायत की है। हम पूरी प्रक्रिया में फिर से अध्ययन करवा रहे हैं। सभी फाइलें खोली जाएंगी। राजस्व और कृषि विभाग के लोगों ने जो प्रक्रिया अपनाई थी उसमें कहां दिक्कत है वह देखा जाएगा। इसकी रिपोर्ट उच्च स्तर पर भी प्रस्तुत की जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here