क्षतिपूर्ति की रकम बढ़ने पर भी आठ हजार किसानों ने नहीं कराया बीमा

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Oct 29, 2018

बिलासपुर 

इस बार प्रति हेक्टेयर साढ़े पांच हजार रुपए क्षतिपूर्ति मिलेगी पर जिले के आठ हजार से ज्यादा किसानों ने अपनी फसल का बीमा ही नहीं कराया। पिछले साल जिस तरह कंपनी ने उन्हें 92 पैसे तक बांटकर ठग दिया, उससे नाराज होकर उन्होंने इस खरीफ सीजन में बीमा नहीं कराया। वैसे तो इस बार 51 हजार 584 किसानों का बीमा हुआ है लेकिन अपनी इच्छा से प्रीमियम देने वाले किसानों की संख्या महज 4394 ही है। यानी इतने ही किसान अऋणी हैं, बाकी ऋणी हैं जिनके प्रीमियम की रकम उनसे पूछे बिना ही बैंकों से ही काट ली गई है।

2017-18 में खरीफ सीजन में जिले के 50 हजार 29 ऋणी तो 12 हजार 496 अऋणी किसानों के 93105.93 हेक्टेयर रकबा फसल का बीमा हुआ था। पूरे जिले में सूखे के बावजूद बीमा के क्लेम का आंकलन करने और उसके बाद क्लेम देने में देर की गई। कई गांवों में जहां भारी सूखे की स्थिति थी, किसानों ने क्लेम नहीं मिलने शिकायत की। किसानों से करोड़ों रुपए लेकर उनकी फसल का बीमा करने वाली कंपनी इफको टोकियो ने सैकड़ों किसानों के साथ मजाक किया। उनके खाते में डेढ़, दो, चार, पांच रुपए ही नहीं 92 पैसे तक जमा कर दिए। सहकारी बैंक की सीपत ब्रांच हो या बिलासपुर की मेन ब्रांच, यहां के कई किसानों के खाते में 92 पैसे, डेढ़ रुपए तक जमा कराए गए। लेकिन फिर सही क्षतिपूर्ति देने कंपनी तैयारी हुई। कई किसानों को क्षतिपूर्ति रकम देने में काफी देर की गई। कुछ किसान तो अभी भी नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। नतीजा ये कि हजारों किसानों का बीमा कंपनी पर से भरोसा उठ गया है। यही कारण है कि जिले में 90 हजार का टारगेट होने के बावजूद 51 हजार 584 का बीमा हुआ, उसमें 47190 किसान तो ऋणी हैं, जिनसे बगैर पूछे प्रीमियम की रकम काट ली गई है। वहीं महज 4394 किसानों ने ही आवेदन देकर बीमा कराया है। पिछले साल आवेदन देकर बीमा कराने वाले किसानों की संख्या 12 हजार 996 थी। इस बार 8102 किसान घट गए।

नौ करोड़ देने वाली थी कंपनी भास्कर ने मुद्दा उठाया तो दिए 63 करोड़

पिछले साल सूखे से जिले के 542 गांवों के 84,803 किसान प्रभावित हुए। 60,908 हेक्टेयर में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचा। तब खरीफ सीजन में 62 हजार 525 किसानों ने फसल बीमा कराया था। उनकी 93 हजार 105 हेक्टेयर फसल का बीमा हुआ। पर फसल कटाई के कई माह बाद 10 हजार 799 किसानों को क्लेम का पात्र पाते हुए 9 करोड़ 34 लाख रुपए देने का निर्णय इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने लिया। कई किसानों के खाते में 92 पैसे तक जमा कर दिए गए। भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित कर किसानों की समस्याओं का मुद्दा उठाया तो कंपनी ने 63 करोड़ 28 हजार रुपए बतौर क्षतिपूर्ति देना स्वीकार किया। इस दौरान दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से किसान कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने बीमा कंपनी पर क्लेम नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए कई बार शिकायतें की। कंपनी के दीवार लेखन को गोबर से पोत दिया गया। इस बार कंपनी बदल गई। इस बार बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को काम मिला लेकिन किसानों ने बीमा कराने रुचि ही नहीं ली।

थोड़ी कम हुई बारिश, किसानों को बीमा कराना था

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