11 दिनों से बारिश नहीं हुई, अब सूखने लगे खेत

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बिलासपुर| Sep 20, 2018

पिछले 11 दिनों से बारिश नहीं होने और लगातार तेज धूप निकलने का ही नतीजा है कि खेत सूखने लगे हैं। खेतों में अभी पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत है। साधन संपन्न किसान अपने खेतों की ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई कर रहे हैं। वहीं जिनके पास साधन नहीं है,उन्हें बारिश के पानी का इंतजार है। आसमान पर बादल छाने से उन्हें बारिश की उम्मीद हो जाती है लेकिन जब वर्षा नहीं होती तो वे उदास व निराश हो जा रहे हैं।

सितंबर माह में भी बिलासपुर में अच्छी बारिश होती रही है। मौसम विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक सितंबर 2010 में सबसे ज्यादा 12 इंच से भी अधिक बारिश हुई थी जबकि उसके पहले साल 2009 में सबसे कम पानी गिरा था। 2008, 2011 व 2012 में 250 से 300 मिमी के बीच बारिश हुई थी। इस बार सितंबर में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई गई। शुरुआत में बारिश हो भी रही है। पहले 6 दिनों में शहर में 20 मिमी बारिश हुई इसके बाद सातवें दिन भी शहर व जिले के कई इलाकों में पानी बरसा। लेकिन इसके बाद छिटपुट बारिश हुई। अब तो 11 दिनों से पानी ही नहीं गिर रहा है। जिले में अब तक 804 मिमी पानी गिरा है लेकिन आठ में से चार तहसीलों में 23 से 35 फीसदी कम बारिश हुई है। इससे किसान चिंतित होने लगे हैं। किसानों की चिंता का कारण खेतों में सूखता पानी है। यदि ऐसे ही बारिश नहीं हुई तो खेतों में पानी पूरी तरह सूख जाएगा। इस साल 2 लाख 14 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हो रही है। पिछले साल का सूखा लोग भूल नहीं पाए है इसलिए ज्यादा डरे हुए हैं। किसानों का कहना है कि आसमान पर बादल छाने से उन्हें थोड़ी उम्मीद हो जाती है लेकिन धूप निकलने से सूखे को लेकर आशंकित हो जा रहे हैं। हालांकि अभी संकट की वैसी स्थिति नहीं है लेकिन बारिश नहीं होने के कारण खेतों में सूखा पानी एक दिन फसल को सूखा देगा। खेत सूखने की शुरुआत हो चुकी है। खेतों के मेढ़ का किनारा अभी सूख रहा है।

वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में पानी की कमी होने लगी है, ट्यूबवेल से िसंचाई की जा रही

तखतपुर से लगे ग्राम बरेला के एक खेत की तस्वीर।

2008 में लगी झड़ी को याद कर रहे लोग : जिले में सितंबर माह में झड़ी भी लगती रही है। 19 सितंबर 2008 को 24 घंटे के भीतर 83.8 मिमी बारिश हुई थी। यह सर्वाधिक है जबकि अब जब सितंबर में तेज धूप निकल रही है लोग 2008 में लगी झड़ी को लोग याद कर रहे हैं। 2009 में 19.4 मिमी, 2010 में 62.4 मिमी, 2011 में 56.2 मिमी, 2012 में 58.5 मिमी, 2013 में 58.6 मिमी, 2014 में 69 मिमी, 2015 में 51 मिमी, 2016 में 29 सितंबर को 48 मिमी बारिश 24 घंटे के भीतर हुई थी। 21 सितंबर 2017 को 43.4 मिमी पानी गिरा था।

चक्रवात के असर से हो सकती है बारिश : पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी और साथ लगे म्यांमार तट पर एक कम दबाव बना है। इसके बराबर एक ऊपरी वायु में समुद्री तल से 7.6 किमी ऊंचाई तक चक्रवाती घेरा बना है। यह दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका है। इसके असर से प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती है।

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