CG – आवारा मवेशियों ने की 13 से ज़्यादा गांवों की फसल बर्बाद

0
408

महासमुंद ब्लॉक के 13 से अधिक गांव के किसान आवारा मवेशियों से परेशान हैं। रात के अंधेरे में मवेशी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों में मवेशियों के चलते 20 एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हो चुकी है। यही कारण है कि किसानों को अब रखवाली के लिए चौकीदार रखना पड़ रहा है। इसके चलते लागत में और बढ़ोत्तरी हो गई है। इधर, किसान संगठन से जुड़े लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनाें से जिले में आवारा मवेशियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। रात के अंधेरे आवारा मवेशियों को गांवों में छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते किसान परेशान हैं। इधर, गांवों में छोड़ी गईं गायें फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। किसानों का कहना है कि जिलेभर में स्थित गोशालाओं और अन्य जगहों से गायों को छोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में गायों की संख्या अचानक बढ़ गई है। इसके चलते आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच आपसी विवाद की स्थिति भी निर्मित हो रही है।

महासमुंद. आवारा मवेशियों के द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

हाल ही में आवारा मवेशियों से ये किसान हुए प्रभावित

आवारा मवेशियों से हो रहे नुकसान पर कनेकेरा के किसान रिखी राम साहू ने बताया कि एक सप्ताह पहले रोपा लगाया गया था, जिसे आवारा मवेशियों ने रात को कुचल दिया। अभी तो जैसे तैसे फसल संभल जाएगा, लेकिन 15 दिनों बाद ऐसा हुआ तो नुकसान और बढ़ जाएगा।

केस- 1

ये गांव हैं प्रभावित

भलेसर, कनेकेरा, बोरियाझर, पिरदा, मालीडीह, कौआझर, कोडारबांध, जलकी, छपोरा, फुसेरा, सोरिद, गौरखेड़ा सहित दलदली गांव सहित 13 से अधिक गावों और आसपास के जंगल में गायें छोड़ी गई है। मवेशी दिन में जंगल में रहते है, लेकिन शाम होते ही वे किसानाें की खेतों में पहुंच जाते हैं।

किसान बोले- पता नहीं इतनी गाय कहां से आ गईं

भलेसर के किसान रामलाल साहू, मानिक, बलदेव ने कहा कि अचानक गायाें की बाढ़ सी आ गई है। ऐसा तब हुआ है, जब धान की रोपाई एवं बियासी का काम चल रहा है। मवेशी खेतों में लगे फसल को चर रहे हैं। नया पेड़ तैयार होने में समय लग जाएगा, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा।

केस- 2

रोपा लगाने के बाद किसानों की चिंता: खुर से दबे पौधे

आवारा मवेशियों से हो रहे नुकसान पर गौरखेड़ा के किसान प्रदीप ध्रुव ने बताया कि अत्यधिक मात्रा में मवेशियों के खेतों में आने से रोपा लगाए गए फसल खुद में दब रहे हैं। पौधों के दबने से उस स्थान पर दोबारा रोपा लगाया जा रहा है। इसके चलते अतिरिक्त मजदूरी लग रही है।

6 हजार रुपए में रखना पड़ रहा चौकीदार

पिछले कुछ दिनाें से जिले में आवारा मवेशियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। किसान नेता जागेश्वर चंद्राकर ने बताया कि मैंने खुद भी मवेशियों के डर से अपने खेत की रखवाली के लिए 6 हजार रुपए में चौकीदार रखा है। यही हाल आसपास के भलेसर, कनेकेरा, परसाडीह, छपोरा, मालीडीह सहित अन्य गांव का है। मुझे कई किसानों ने फोन पर इसकी सूचना दी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here