किसानों को 355 करोड़ का बांटा गया था लोन, 31 करोड़ की वसूली अब भी है बाकी

0
589

 

किसानों ने खाद-बीज के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित से कर्ज तो लिया पर उसे चुकाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा नोटिस पर नोटिस थमाई जा रही है, लेकिन किसानों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जिले में सहकारी समितियों ने किसानों को पिछले खरीफ सीजन में 355 करोड़ 7 लाख रुपए का लोन बांटा था। इसमें से 30 जून 2018 तक बैंक ने 324 करोड़ 16 लाख रुपए की ही वसूली की है। तमाम कोशिशों के बाद भी बैंक अब तक 31 करोड़ रुपए वसूल नहीं कर पाया है। कर्ज न पटाने वाले ऐसे 9,673 किसान हैं, जिनसे 31 करोड़ रुपए बैंक को वसूलना है। नहीं किसानों का कहना है कि इस साल कर्ज माफी की उम्मीद के चलते कर्ज नहीं पटा रहे हैं।

जितनी वसूली जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सहकारी समितियों के जरिए की है उसमें से करीब 90 फीसदी धान खरीदी के दौरान लिंकिंग के जरिए ही की गई है। किसानों से धान खरीदी के दौरान भी पूरी राशि की वसूली नहीं हो पाई है। हर साल 25-30 करोड़ रुपए का कर्ज किसान जमा नहीं कर रहे हैं। बावजूद इसके बैंक के अधिकारी उन पर कोई दबाव नहीं बना पा रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल उन्हें कर्ज नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर डिफाल्टर किसानों को भी अब तक कोई नोटिस जारी नहीं की गई और न ही उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जा रही है।

किसानों को कर्ज माफी की उम्मीद इसलिए नहीं पटा रहे : चुनावी वर्ष में कर्ज माफी की उम्मीद में किसान इस साल भी कर्ज की अदायगी नहीं कर रहे हैं। इससे किसानों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। किसानाें ने कहा कि इस साल कर्नाटक में किसानों का कर्ज माफ कर दिया गया है। मध्यप्रदेश में भी इसकी तैयारी चल रही है। उम्मीद है कि छग की सरकार भी कर्ज माफ कर देगी।

24,436 डिफाल्टर किसानों में से 11,480 ने पटाया कर्ज

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017-18 तक बस्तर संभाग में कर्ज नहीं पटाने वाले डिफाल्टर किसानों की संख्या बढ़कर 24,436 तक पहुंच गई थी। इसमें से कर्ज जमा नहीं करने से बाद में कर्ज नहीं मिलने से चिंतित 11,480 किसानों ने कर्ज पटाया है। बावजूद इसके बैंक को डिफाल्टर किसानों से अब भी 69 करोड़ रुपए वसूलने हैं। बैंक वसूली किस तरह से करेगा, कोई उत्तर बैंक के अधिकारी नहीं दे पा रहे हैंं।

सहकारिता न्यायालय में दर्ज होगा मामला : सीईओ

जिला सहकारी केंद्रीयय बैंक के सीईओ ए रजा ने कहा डिफाल्टर (कालातीत) किसानों पर कार्रवाई के लिए जिला सहकारी केंद्री बैंक द्वारा पंजीयक कार्यालय में केस दायर किया जाएगा। इसके बाद वहां के अधिकारी कर्ज वसूली के लिए सहकारिता न्यायालय में इस मामले को दर्ज करेंगे। वहां से फिर किसानों को नोटिस जारी होगा। इसके अलावा जिन किसानों ने पिछले साल का कर्ज अब तक जमा नहीं किया है उनसे धान खरीदी के सीजन में वसूली की जाएगी।

जिला कर्जदार किसान राशि

बस्तर 14334 135 करोड़ 44 लाख

कोंडागांव 14417 62 करोड़ 322 लाख

नारायणपुर 1838 8 करोड़ 80 लाख

कांकेर 33526 110 करोड़ 17 लाख

दंतेवाड़ा 1730 5 करोड़ 18 लाख

सुकमा 1855 9 करोड़ 85 लाख

बीजापुर 5686 23 करोड़ 39 लाख

इतने रुपए बांटा गया था कर्ज

नियम शिथिल हुआ तो कुर्की का डर खत्म

राज्य सरकार ने किसानों को ऋण देने के नियम को शिथिल कर दिया है। इसके चलते किसान कर्ज लेने के बाद भी बेफ्रिक हो गए हैं और लोन पटाने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। पहले बैंक द्वारा 4 से 5 साल तक ऋण नहीं पटाने वाले किसानों के पास कुर्की का नोटिस भेजा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here