गांवों में सेवा के नियम को चुनौती, 291 याचिका खारिज

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स्टेट कोटे से एमबीबीएस करने के बाद दो साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के लिए बांड भरने और इसका उल्लंघन करने पर पेनाल्टी जमा करने के नियम को निरस्त करने की मांग करते हुए लगाई गई 291 याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हैं। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित ग्रामीणों को बेहतर इलाज की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाए गए नियम को उचित बताया है।

राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ मेडिकल, डेंटल, फिजियोथेरेपी एंट्रेस रूल्स 2012 के तहत 9 अप्रैल 2012को प्रदेश के एमबीबीएस कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने का नियम जारी किया था। इसके तहत स्टेट कोटे से एमबीबीएस में एडमिशन लेने वाले छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्र में स्थित शासकीय चिकित्सालय या संस्था में दो साल तक सेवा देने के संबंध में बांड भरना था। एमबीबीएस में एडमिशन लेकर पढ़ाई पूरी करने वाले 291 छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर इस नियम को अनुचित बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी।

सरकार का उद्देश्य

ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से दिए गए तर्कों को नामंजूर करते हुए कहा है कि यह नियम लागू करने के पीछे राज्य सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले ग्रामीणों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसा सुनिश्चित करने के लिए बांड भरने का नियम लागू किया गया है।

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