50 फीसदी धान की फसल सूखने की कगार पर अभी डैमों में भी पर्याप्त पानी नहीं, किसान चिंतित

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बैकुंठपुर | Oct 04, 2018

9 सितंबर से जिले में बारिश नहीं हुई है। जिले में खंड बारिश के कारण लगातार दूसरे साल भी धान की फसल को नुकसान होने लगा हैं। जिले के वे किसान अधिक चिंतित हैं। इन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर खेती किया था। वहीं जिले में एेसे किसान फसल बीमा में भी रूचि नहीं लेते हैं।

दूसरी ओर जिन किसानों ने समितियों के माध्यम कर्ज लेकर खेती का किया था। चिंतित वे भी लेकिन कर्ज को लेकर थोड़ी राहत उन्हें जरूर मिल रही हैं क्योंकि कर्ज लेने के साथ ही उनके खेतों का फसल बीमा हो जाता हैं। गौरतलब है कि जिलें छोटे-बड़ कुल मिलाकर 80 हजार किसान हैं। जिले में इस साल धान का रकबा घटा कर 59 हजार हेक्टेयर किया गया हैं। इनमें 15 हजार किसान से समितियों में रजिस्टर्ड हैं। 65 हजार किसान एेसे हैं। इन्होंने बाजार में साहूकार से कर्ज लेकर खेती किया है। अब मनरेगा के तहत भी काम बंद है। किसानों की आय का साधन ही इन दिनों बंद है। ऐसी स्थिति में अब किसान हर रोज काम की तलाश में जिला मुख्यालय घड़ी चौक सुबह पहुंच रहे हैं कि उन्हें ठेकेदारी में काम मिल जाए। औसत से कम हुई बारिश के कारण धान की खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

60 हजार हेक्टेयर में की धान की खेती, बचे खेतों में अरहर, ज्वार, बाजरा, तिल, उरद, मूंग को बोया

सिंचाई के अभाव में फसल पड़ने लगी पीली

अनुमान के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। इससे किसान चिंतित हैं। शुरूआत में हुई झमाझम बारिश ने किसानों को राहत दी थी लेकिन मौसम के बदले रुख ने उनकी बेचैनी बढ़ा रखी है। खरीफ की खेती में इस साल इंद्र भगवान किसानों को दगा दे गए। सावन के महीने में झमाझम बारिश होने पर किसानों ने 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई की। इसके बाद बचे हुए खेतों में अरहर, ज्वार, बाजरा, तिल,उरद, मूंग की बोनी की। जुलाई के अंतिम और अगस्त माह में हुई बारिश से किसानों में बंधी रही कि सितंबर महीने में बारिश न होने से खेतों की नमी गायब होने लगी। सिंचाई के अभाव में खेतों की फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों को सूख रही फसलों को बचा पाने के लिए कोई तरकीब नहीं सूझ रही है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण दोनों की ही धीरे-धीरे फसल खराब हो रही है और सूखने की कगार पर पहुंचती जा रही है। गौरतलब है कि क्षेत्र में की नहर जाम हैं, डैमों में भी पर्याप्त पानी भी नहीं है ताकी सिंचाई कर सकें।

क्षेत्र के एक किसान के खेत में लगी धान की फसल। इसे इस समय पानी की दरकार है। नहीं तो सूखने लगेगी।

इस बार मौसम विभाग का अनुमान रहा फेल

टेंगनी, अमरपुर, कंचनपुर, बुडार, चेर आनी, नरकेली, मंचगवा के सैकड़ों किसानों के चेहरे से फसल की हालत को देखकर रौनक गायब हो गई है। इस समय फसल को दो से तीन पानी की जरूरत हैं। इस साल अच्छी बारिश की उम्मीद जताई गई थी लेकिन मौसम विभाग की भविष्यवाणी भी इस साल दगा दे गई है।

कांग्रेस नेत्री ने की किसानों को राहत देने की मांग

अल्प व खंड वर्षा के कारण नदी, तलाब स्टाप डैम सहित बांधों में पानी पर्याप्त पानी नहींं है कि सिंचाई के लिए दिया जा सके। धान की हालत देखकर चिंता जताते हुए कहा कांग्रेस की संगीता राजवाड़े ने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों को राहत देने जल्द ही कोई पहल करें। इससे किसानों को मजदूरी के लिए पलायन न करना पड़े।

किसान बोले- लागत निकल जाए ताकी कर्ज चुका पाएं

अमरपुर के किसान किशुनराम, जवाहिर, अवधराम, खड़गवां के अशोक श्रीवास्तव, राजमोहन, पटना से अशोक सिंह, विजय सिंह, बिहारीलाल राजवाड़े, रामलाल राजवाड़े सहित बैकुंठपुर के चंद्रप्रकाश राजवाड़े ने बताया कि बारिश नहीं हुई हैं। जिन किसानों ने पहले धान की बोनी की थी उनकी लगात निकल आए ताकी वे कर्ज चुका सकें।

अगर फसल में पीलापन आया तो ये रोग के लक्षण

एक बार भी बारिश हो जाए तो फसल संभल जाएगी

हमारे पास पर्याप्त बजट

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