माइनर को अधूरा छोड़ने से सौ हेक्टेयर में नहीं हो पाती सिंचाई, अफसर नहीं देते ध्यान

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कोरबा | Oct 06, 2018

हसदेव बांगो बांध भले ही जिले में है लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिलता है। बांध की सिंचाई क्षमता ढाई लाख हेक्टेयर है। पर जिले में मात्र 6 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई हो पाती है। करतला ब्लाॅक के अंतिम छोर में बसे गांव के लोगों को माइनर अधूरा होने के कारण पानी पहुंचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। सौ हेक्टेयर में पानी नहीं पहुंच पाता। इसका कंट्रोल जांजगीर-चांपा जिले से होने के कारण यहां के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

करतला ब्लाॅक के उमरेली, सुखरीकला, सुखरीखुर्द, अमलडीहा पंचायत के किसानों को हर साल खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। उमरेली में माइनर का निर्माण कराया जा रहा था। इसे अधूरा छोड़ दिया गया है। इसकी वजह से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। इसके लिए कई बार किसान मांग कर चुके हैं। लेकिन इसका नियंत्रण जांजगीर-चांपा जिले के अफसरों के पास है। इसके कारण सुनवाई नहीं होती हैं। अगर माइनर का निर्माण कर दिया जाए तो 100 हेक्टेयर में आराम से पानी खेतों तक पहुंच जाएगा। डेढ़ महीने से बारिश नहीं हो रही है। इसके कारण किसान खेतों तक पानी ले जाने के लिए अपनी व्यवस्था कर रहे हैं। कई लोग नदी, नालों से सिंचाई कर रहे हैं। तो कई लोग नहर के पानी को खेतों तक ले जाने के लिए पंप का उपयोग कर रहे हैं। बीच में बरपाली क्षेत्र के नहर को हसदेव बरॉज संभाग को सौंपने व जर्वे क्षेत्र को जांजगीर-चांपा में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक इसकी मंजूरी नहीं मिली है।

बागों बांध के पानी से 6 हजार हेक्टेयर में ही हो पाती है फसल की सिंचाई

अधूरा माइनर जिसके आगे नहीं जाता पानी।

हर साल जलकर देते हैं फिर भी नहीं पहुंचता पानी

नवापारा के सुरेश कुमार यादव का कहना है कि माइनर नहीं होने से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए सभी को रतजगा करना पड़ता है। सिंचाई विभाग के कर्मचारी हर साल जलकर जमा करने नोटिस देते हैं। किसान जमा भी करते हैं, इसके बाद भी कोई देखने नहीं आता। एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आ जाता है।

पानी को लेकर हर साल होता विवाद: धर्मेन्द्र

सुखरीकला के धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए हर साल लोगों के बीच विवाद होता है। सिंचाई विभाग के अधिकारी, कर्मचारी नहरों की देखरेख भी नहीं करते। किसान किसी तरह खेतों तक पानी ले जाते है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

नदी में बह जाता है अधिकांश पानी

अमलडीहा के मुन्नालाल ने कहा कि नहर का पानी ले जाने के लिए माइनर की हालत खराब है। निचले हिस्से से होते हुए पानी सोन नदी में चला जाता है। माइनर का निर्माण हो जाने से किसानों को काफी सुविधा होगी। इसकी लंबे समय से मांग की जा रही है। इसके बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

42 किलोमीटर में से 18 किमी नहर ही जिले में

दर्री बरॉज से बायीं तट व दायीं तट नहर निकली है। जो जांजगीर-चांपा गई है। हसदेव दर्री बरॉज संभाग का नियंत्रण बरपाली तक ही है। उसके आगे नहर की देखरेख का जिम्मा जांजगीर-चांपा जिले के अधिकारी देखते हैं। 18 किलोमीटर के आगे बरपाली से फरसवानी, उमरेली तक की नहर की जिम्मेदारी अलग हो जाती है। इसकी वजह से ही अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस क्षेत्र में खेतों तक पानी पहुंच रहा है कि नहीं यह भी अधिकारी देखने नहीं जाते।

माइनर के निर्माण की शीघ्र लेंगे जानकारी : एसई

हसदेव बांगो परियोजना के अधीक्षण अभियंता एलएस चंद्राकर का कहना है कि अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए अमला जुटा है। अगर माइनर का निर्माण अधूरा है तो इसकी जानकारी ली जाएगी। साथ ही जिले के हिस्से को हसदेव दर्री बरॉज में शामिल करने के प्रस्ताव पर भी विचार करेंगे।

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