बिजली कटौती और मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने किया चक्काजाम

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मनेंद्रगढ़ | Oct 06, 2018

कोरिया जिले के भरतपुर के किसानों ने बिजली कटौती और मुआवजा नहीं मिलने को लेकर तहसील मुख्यालय के चारों रास्ते को बंद कर चक्काजाम किया, हालांकि इससे आम लोगों को थोड़ी परेशानी जरूर हुई, पर वो इस विरोध में सरकार के खिलाफ दिखे।

जानकारी के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भरतपुर के किसान व आमजनों ने चक्काजाम करने का ज्ञापन एसडीएम को देकर जबर्दस्त चक्काजाम किया। प्रशासन ने चक्काजाम को देखते हुए काफी संख्या में सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी। पहले तहसीलदार मनमोहन सिंह मौके पर पहुंचे ओर प्रदर्शन कर रहे किसानों को समझाने का प्रयास किया। उनके साथ बिजली विभाग के एई, जेई साथ थे। कुछ देर बाद एसडीएम श्री पैकरा मौके पर पहुंचे। लोगों ने उनसे 7 साल पहले बनी सड़क के मुआवजे की मांग की जिस पर उन्होंने बताया कि वे अभी आए हैं, अब ग्रामसभा लेकर भू-अर्जन का कार्य जल्द से जल्द किया जाएगा जिसमें आप सबकी मदद की जरूरत भी है। इसके उपरांत युवा नेता अंकुर प्रताप सिंह ने समस्याओं के संबंध में बताया जिस पर चार लिखित मांगों को लेकर प्रशासन ने आश्वासन दिया वहीं मौके पर उपस्थित पीसीसी सदस्य गुलाब कमरो कहना है कि 15 साल से भाजपा का शासन है। मप्र से अलग होने के बाद आज भी उधार की बिजली पर यहां के लोग निर्भर हैं। खेतों में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए राज्य सरकार 24 घंटे बिजली का दावा करती है जबकि हकीकत कुछ और है। मप्र की बिजली से लो वोल्टेज और कटौती से हर किसान नाराज है। मात्र 4 से 6 घंटे ही यहां बिजली मिल पा रही है। खेतों में पानी चाहिए, परंतु बिजली के अभाव में वे बेहद परेशान हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिक रवि प्रताप सिंह ने कहा कि धान की फसल मरने के करीब है। बिजली का ये हाल है कि मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसानों की हालत आसानी से समझी जा सकती है। इस अवसर पर अमित गुप्ता, संजू गुप्ता, नफीस खान, दीपक सोनी, मनु जैन, कमल, लालसाय, बाबूराम, गुल्लू पांडेय, अवधेश, नूर मोमद, अरमान खान, विक्की जगवानी, राजू सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

जमीन का मुआवजा नहीं मिला

जानकारी के अनुसार जिले की भरतपुर तहसील के जनकपुर और कोटाडोल मार्ग का निर्माण कराया गया। इसमें उनकी जमीन ली गई लेकिन आज तक किसी को मुआवजा नहीं मिल पाया है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने इसके लिए किसी से गुहार नहीं लगाई, परंतु सरकार ने उनके हक की मांग पर आज तक विचार नहीं किया। हमारी जमीन भी ले ली गई, परंतु मुआवजा देने के नाम पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है।

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