बस्तर : लामकेर के 120 किसानों ने 100 एकड़ में की सामूहिक खेती, बढ़ाई अपनी आमदनी

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बस्तर Apr 27, 2019

बस्तर जिले में सामूहिक खेती को बढ़ावा देने कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान के केंद्र के वैज्ञानिकों की कोशिश बस्तर जिले में सफल रही। इसका लाभ किसानों को यह मिला कि लामकेर के किसान नदी के किनारे खेत होते हुए भी केवल मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हुए धान की खेती कर रहे थे। वहीं इस साल इस गांव के 120 किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और मदद के चलते रबी के सीजन में 100 हेक्टेयर में सामूहिक खेती की।

कम समय में अधिक फायदा देने वाली फसलों का चयन कर इन किसानों ने 30 एकड़ में मक्का, 25 में चना, 20 एकड़ में गेहूं और 20 एकड़ में सब्जी की खेती कर इसका फायदा लिया। कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचरण प्रजापति और डॉ आरएस नेताम ने कहा कि यह पहली बार हुआ है जब किसानों ने वैज्ञानिकों की बात मानकर इतने बड़े रकबे में खेती कर इसका फायदा लिया है। प्रजापति ने कहा कि किसान अब खरीफ के साथ- साथ रबी की खेती बिना किसी परेशानी के कर सकेंगे ।

जगदलपुर । सामूहिक खेती देखने पहुंचे कलेक्टर और जिपं सीईओ।

70 एकड़ जमीन को बनाया खेती के लायक

सामूहिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई योजना में कृषि वैज्ञानिकों ने सबसे पहले नदी के किनारे उस भूमि को चुना जहां किसान खेती न के बराबर करते थे। कृषि वैज्ञानिक प्रजापति ने कहा कि यह रकबा करीब 70 एकड़ का था। जहां सिंचाई सुविधा नहीं होने और आवारा मवेशियों से नुकसान की आशंका के चलते किसान खेती नहीं करते थे। सुरक्षा और सुविधाएं देने से ये किसान इस समय मक्का, उड़द, भिंडी, करैला और लौकी के साथ ही अन्य फसल ले रहे हैं।

योजना पर खर्च हुए 29 लाख

सामूहिक खेती शुरू करने कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र ने इस पर 29 लाख रुपए खर्च किए। वैज्ञानिक आरएस नेताम ने बताया कि इस पैसे से किसानों को स्प्रिंकलर, मोटर और आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए चैन लिंकिंग की सुविधा दी गई। इसके अलावा किसानों के लिए तालाब , कुएं और नाडेप के साथ ही अन्य कृषि यंत्र दिए गए। गौरतलब है कि इस योजना के लिए जिला प्रशासन ने खनिज न्यास निधि से कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र को 32 लाख रुपए दिए थे।

कलेक्टर और जिपं सीईओ ने की वैज्ञानिकों की तारीफ

कृषि वैज्ञानिकी के द्वारा की गई कोशिश को देखने के लिए सोमवार को कलेक्टर डॉ अयाज फकीर भाई तंबोली और जिला पंचायत सीईओ इस गांव में पहुंचे थे। नदी किनारे की गई सामूहिक खेती को लेकर दोनों अधिकारियों ने कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ एससी मुखर्जी और वैज्ञानिकों की तारीफ की और किसानों को हौसला बढ़ाया। इस दौरान किसानों ने अधिकारियों से इंद्रावती नदी का पानी लिफ्ट कर गांव तक पहुंचाने और गांव में तालाब बनवाने की मांग की।

किसान बोले- सुरक्षा के बाद नहीं हो रही परेशानी

किसान सुशील कश्यप ने कहा कि इस क्षेत्र में आवारा मवेशियों के चलते खेती करने में काफी परेशानी हो रही थी । फसलों की सुरक्षा को लेकर उन्हें चैन लिंकिंग (लोहे की जाली) की सुविधा दी गई। अब खेती करने में परेशानी नहीं हो रही है। किसान चंदर कश्यप, मंगलू कश्यप और लक्ष्मीनाथ ने कहा कि सिंचाई के साधन नहीं होने से वे अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहे थे। अब सिंचाई के साधन मिल गया है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर हम खेती कर इसका लाभ ले रहे हैं।

लामकेर के बाद भोंड में भी होगी अब सामूहिक खेती

कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एससी मुखर्जी ने कहा कि लामकेर में की गई कोशिश के सफल होने के बाद बस्तर ब्लाक के भोंड में 200 एकड़ में सामूहिक खेती की जाएगी । इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। किसानों को यहां पर सिंचाई व अन्य सुविधाएं देने के लिए जिला पंचायत की ओर से 35 लाख रुपए मिले हैं। यहां पर भी 100 किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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