6 महीने में 151 में से 19 किसानों को ही कृषि यंत्र दे पाया विभाग, बाकी चक्कर लगा रहे

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जगदलपुर Nov 21, 2018

किसानों को सब्सिडी में कृषि यंत्र 151 किसानों को दिया जाना है। इसके तहत 401 किसानों का पंजीयन किया गया है। योजना के 6 महीने से अधिक का समय गुजरने के बाद भी बीज विकास निगम ने केवल 19 किसानों को ही दे पाया है । जानकारी के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझते किसानों ने शासन की योजनाओं का लाभ लेने पहले आओ पहले पाओ के आधार पर पंजीयन तो करवा लिया लेकिन वे उपकरण लेने के लिए परेशान हो रहे हैं।

कृषि उपकरण की खरीदी में सब्सिडी के बाद भी आबंटन के लिए दिए गए लक्ष्य में अब तक केवल 6 फीसदी पूरा हो पाया है । किसानों को योजना का अधिक से अधिक लाभ देने कृषि विभाग के अधिकारियों के जरिए इन किसानों का प्रकरण तैयार कर बीज विकास निगम को भेजा गया था। अफसरों ने उम्मीद की थी किसानों को ये उपकरण जल्द से जल्द मिल जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। समय पर कृषि यंत्र नहीं मिलने से कई किसान कृषि विभाग के अफसरों पास चक्कर लगा रहे हैं। बीज विकास निगम के प्रबंधक ए चौधरी ने दावा किया कि फरवरी 2019 तक सभी किसानों को कृषि यंत्र दे दिया जाएगा ।

अनुदान देने में गड़बड़ी ,जांच के लिए मुख्यालय भेजा प्रकरण : किसानों को बिना बिचौलिए के ही उपकरण मिले इसलिए चैप्स की शुरूआत की गई है। योजना में गड़बड़ी करते पाए जाने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला बनाकर बीज विकास निगम के प्रबंधक ने मुख्यालय भेजा है। अब तक जांच नहीं हो पाई है । गड़बड़ी की जानकारी देते हुए बनियागांव के किसान अनंतराम सेठिया ने बताया कि उन्होंने चैप्स योजना के अंतर्गत मेसर्स सुरजीत एग्रीकल्चर इंडस्ट्रीज जगदलपुर से 18 दिसंबर 2017 में मल्टी क्राप थ्रेसर खरीदा था।

इस क्रेशर को खरीदने के लिए एक लाख 95 हजार रुपए सुरजीत कंपनी को दिए। अनुदान राशि अब तक नहीं मिली है। बीज विकास निगम के प्रबंधक ने कहा कि किसान की शिकायत के बाद इस मामले की जानकारी बीज विकास निगम के अपर संचालक डीडी मिश्रा को दे दी गई है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है ।

लंबी-चौड़ी चैप्स प्रणाली बनी मुसीबत किसानों के लिए

किसानों को कृषि यंत्र लेने में कोई परेशानी नहीं हो इसको लेकर पिछले साल से चैप्स (छत्तीसगढ़ एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन एंड माइक्रो इरिगेशन मॉनिटरिंग प्रोसेस सिस्टम) को लागू किया है। किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। योजना की जटिल प्रक्रियाओं में फंस किसान अब दूरी बना रहे हैं। बीज विकास निगम के प्रबंधक ने बताया कि इस योजना के तहत अपने पसंद के कृषि उपकरण बिना किसी बिचौलिए के पास जाए खुद ही कंपनी से खरीद सकता है। पहले किसानों को ऑनलाइन पंजीयन कराना पड़ता है। किसान जिस कृषि यंत्र को लेना है उसके दस्तावेज कंपनी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पास जमा करता है। इसके बाद दस्तावेजों की जांच कर इसे कंपनी अपलोड करेगी । यह डाटा बीज विकास निगम के मुख्यालय में जांच के लिए जाता है। जांच के बाद दस्तावेजों के सही पाए जाने पर स्वीकृति दी जाती है। इस प्रकिया में कम से कम 10 दिन लग रहे हैं।

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