17 गांवों के किसान उगा रहे हाईब्रिड गेंदा, धान से 5 गुना ज्यादा फायदा

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कांकेर Oct 24, 2018

जिले में धान, दलहन, तिलहन के अलावा किसानों को अधिक लाभ देने फल-सब्जी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा था। अब किसानों को और अधिक लाभ दिलाने कांकेर मेरीगोल्ड चैन प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत किसानोंं को गेंदा फूल लगाने प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पहले चरण में कृषि विभाग ने 17 ग्राम पंचायतों में हाईब्रिड गेंदा फूल लगाने अभियान शुरू किया है। इसके लिए 120 किसानोंं को वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षण भी दिया। प्रशिक्षण में गेंदा फूल लगाने के तरीके, मार्केटिंग की जानकारी दी गई।

45 महिला कृषक भी जुड़ीं

गेंदा फूल योजना में 45 महिला कृषक भी जुड़ी हैं। किसानों को गेंदा फूल किट भी दी गई जिसमें खाद्य बीज, दवाइयां है। 15 सितंबर से किसानों ने गेंदा फूल बीज खेतों में डाल तैयारी शुरू की।

कांकेर। किसानों ने लगाई उन्नत तरीके से गेंदा फूल की फसल।

55 दिन में होगा तैयार

गेंदा 55 दिन में तैयार हो जाएगा। देसी गेंदा दिसंबर माह के बाद समाप्त हो जाता है लेकिन इसका उत्पादन मार्च तक होगा। देसी गेंदा फूल की अपेक्षा हाईब्रिड का उत्पादन 5 गुना ज्यादा होता है। हाईब्रिड गेंदा का आकार भी बड़ा होता है।

ये हैं 17 पंचायतें जहां हो रही गेंदा फूल की खेती

दसपुर, गढ़पिछवाड़ी, लारगांव मरकाटोला, भैंसासुर, कराठी, कोयलीबेड़ा, चांदीपुर, अरौद, दरगहन, जेपरा, देवडोंगर, घोटुलमुंडा, गोविंदा, कुआंपानी, कोयलीबेड़ा। कुल 22 एकड़ कृषि भूमि मेंं हाईब्रिड प्रजाति का गेंदा फूल लगाया गया है।

गेंदा में हो रहा फायदा: कृषि सहायक संचालक

कृषि सहायक संचालक सूरज पंसारी ने कहा जिला प्रशासन व कृषि विभाग ने गेंदा फूल लगाने किसानों को प्रेरित किया है। कीट भी प्रदाय किया गया है। गेंदा फूल की मांग काफी ज्यादा है।

प्रति एकड़ 1 लाख रुपए तक हो रही आमदनी

गेंदा में एक एकड़ में 1 लाख तक की आमदनी होती है जबकि धान फसल में एक एकड़ में 10 से 15 हजार तक की ही आमदनी होती है। हाईब्रिड गेंदा फूल उत्पादन एक एकड़ में 80 से 100 क्विंटल होता है वहीं धान 20 क्विंटल धान होता है। गेंदा फूल में धान की अपेक्षा पानी भी कम लगता है।

किसानों ने बताया- इसकी मांग काफी ज्यादा है

गढ़पिछवाड़ी के किसान तरेंद्र भंडारी ने कहा अभी शुरू साल आधा एकड़ में गेंदा फूल लगाया है। इसकी मांग काफी ज्यादा है। फिलहाल कांकेर में गेंदा फूल बाहर से पहुंचता है। यहीं होने लगेगा तो बाहर से नहीं मंगाना पड़ेगा। गढ़पिछवाड़ी के किसान चमरूराम सलाम, दसपुर के नंदकिशोर साहू ने कहा गेंदाफूल खेती में पानी काफी कम लगता है।

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