4 माह में 460 किसानों की 26 लाख की धान खा गए हाथी, 56 मकानों को तोड़ा, गुस्से में ग्रामीण

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कोरबा Oct 25, 2018

वनमंडल कोरबा में पिछले साल हाथियों ने 2 करोड़ रुपए धान की फसल को नुकसान पहुंचाया था। इस साल 4 महीने में ही 460 किसानों की 26 लाख का धान खा गए। इस दौरान 56 मकानों को भी तोड़ दिया। अभी भी वनमंडल में 43 हाथी धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग ग्रामीणों को सतर्क करने में ही जुटा रहता है। हाथी नियंत्रण के सभी उपाय फेल हो गए हैं। जिसकी वजह से ग्रामीणों में आक्रोश है। कई किसान तो धान का बीज भी नहीं पाएंगे। रामपुर विधानसभा पूरी तरह हाथी प्रभावित है।

कुदमुरा, करतला, पसरखेत, बालको, कोरबा व लेमरू वन परिक्षेत्र हाथी प्रभावित हैं। जहां वर्ष भर हाथी 40 से 50 की संख्या में हर समय घूमते रहते हैं। वनांचल के ग्रामीण खरीफ के साथ गर्मी के समय नदी-नालों के किनारे की खेतों में धान की फसल लेते हैं। जिसकी वजह से हाथियों को पर्याप्त भोजन मिलता है। इसी वजह से कोरबा जंगल को छोड़ना नहीं चाहते। वन विभाग ने पहले हाथियों को खदेड़ने हुल्ला पार्टी का उपयोग किया गया लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुआ।

कुदमुरा, करतला, पसरखेत, बालको, कोरबा और लेमरू वन परिक्षेत्र में घूम रहे हाथी

हाथियों ने तोड़ा मकान। कुदमुरा क्षेत्र में विचरण करते हाथी।

7 महीने में हाथियों ने 9 ग्रामीणों को मारा, 2 घायल

अप्रैल से अब तक 7 महीने के दौरान दंतैल हाथी ने 9 ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया। साथ ही हाथी हमले में दो लोग घायल हुए हैं। 7 ग्रामीणों के परिवारों को 28 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान किया गया है। दो प्रकरण लंबित है। इसी तरह हाथी ने 4 मवेशियों को भी मार डाला। इसके एवज में भी 22 हजार 500 रुपए का भुगतान किया गया है।

अब इसका उपयोग गांव में हाथियों को घुसने से रोकने के लिए किया जाता है। वन विभाग का मानना है कि हाथियों को खदेड़ने से और आक्रामक हो जाते हैं। इसके बाद ज्यादा नुकसान करते हैं। अभी तक दंतैल हाथी ज्यादा उत्पात मचाता है। दल से अलग होने के बाद दंतैल आबादी क्षेत्र में अधिक घूमता है। इसी वजह से वन विभाग की निगरानी बढ़ा दी जाती है। अभी धान की फसल तैयार हो गई है। एक माह के भीतर नुकसान का आंकड़ा बढ़ सकता है। पिछले एक सप्ताह से करतला व कुदमुरा परिक्षेत्र में 43 हाथी रोज 30 से 40 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग ने फसल क्षति का 25 लाख 76 हजार 560 रुपए भुगतान कर दिया गया है। साथ ही मकानों को तोड़ने की एवज में 5 लाख 97 हजार 580 रुपए का भुगतान किया गया है।

धान की फसल तैयार, बढ़ सकता है नुकसान का आंकड़ा वन विभाग ने कहा दंतैल हाथी आबादी क्षेत्र में अधिक धूमता है

6 में 3 वन परिक्षेत्र प्रभारियों के भरोसे

हाथी उत्पात को रोकने के लिए शासन गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 वन परिक्षेत्र में से 3 कोरबा, पसरखेत व करतला में रेंजर ही नहीं है। 3 परिक्षेत्र कुदमुरा, बालको व लेमरू में ही रेंजर हैं। जिसमें दो रेंजर अगले साल जून में रिटायर हो जाएंगे। रेंज ही प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। इससे भी हाथी नियंत्रण प्रभावित हो रही है।

ट्रेकिंग के लिए वाहन के साथ कर्मी तैनात होंगे

पहली बार हाथियों की ट्रेकिंग के लिए शासन से वाहन मिली है। साथ ही अलग से कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाएगी। कुदमुरा को सेंटर बनाया जाएगा। अभी 12 कर्मियों की भर्ती की गई है। इसी में से ट्रेकिंग के लिए कर्मचारी तैनात होंगे। अभी 11 कर्मचारियों ने ज्वाइनिंग कर ली है। इन्हें ट्रेनिंग के बाद मैदानी क्षेत्र में भेजा जाएगा।

लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता: डीएफओ

वनमंडल के डीएफओ एस वेंकटाचलम का कहना है कि लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता है। फसल का नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाता है। हाथियों को अब नहीं खदेड़ा जाता। इससे वे अधिक आक्रामक हो जाते हैं। एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाकर नुकसान करते हैं। अफसरों की कमी के बाद भी हाथी उत्पात रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

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