सूखे के हालात, कोडार से पानी छोड़ बचाई गई 17 हजार हेक्टेयर फसल

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महासमुंद Oct 25, 2018

पिछले तीन साल में इस वर्ष महासमुंद जिले में अच्छी बारिश हुई है। लेकिन सितंबर में बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र में सूखे के हालात थे। हालांकि अच्छी बारिश के चलते तीन साल में पहली बार 88 फीसदी भर चुके कोडार बांध से पानी छोड़कर फसलों को बचा लिया गया है। इस साल सितंबर महीने में ही कोडार से पानी छोड़ा गया, जिसके चलते बारिश नहीं होने के बावजूद फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। सितंबर एवं अक्टूबर माह में बारिश नहीं होने से धान की फसल मुरझाने लगे थे। किसानों की मांग पर कोडार से पानी छोड़ा गया, जिसके चलते 50 गांव के करीब 17 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल को बचाया जा सका है। बेमचा के किसान रामसिंग ध्रुव, परसदा हीरासिंह, तुमगांव जर्नादन चंद्राकर, नरेंद्र चंद्राकर के किसानों ने बताया कि कोडार में पानी नहीं रहता तो उसके धान की फसल इस बार भी बर्बाद हो जाती।

9 सितंबर से 23 अक्टूबर तक मात्र 72 मिमी बारिश, इसलिए बढ़ी परेशानी: दरअसल, सितंबर महीने में काफी कम बारिश हुई। यही कारण है कि धान की फसलें सूखने लगी। मौसम विभाग की मानें तो 9 सितंबर से 23 अक्टूबर तक मात्र 72 मिमी बारिश जिले में दर्ज की गई है। जो धान की फसल के लिए प्रर्याप्त नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो सितंबर और अक्टूबर माह में करीब 150 से 200 मिमी बारिश होनी थी, जो किस इस साल नहीं हुई।

महासमुंद| कोडार बांध के पानी से पककर तैयार अरली वैरायटी की कटाई करते हुए कौंदकेरा के किसान।

17 हजार हेक्टेयर एरिया में होती है सिंचाई

जल संसाधन विभाग के अफसरों ने बताया कि कोडार बांध से 17 हजार हेक्टेयर एरिया में सिंचाई होती है। इस बार खरीफ सीजन में पानी छोड़ने के कारण बांध आधा खाली हुआ। बांध में 57 फीसदी पानी होने के कारण समस्या नहीं है। गर्मी में 50 गांवों में निस्तारी तालाब भरने के साथ साथ रबी फसल के लिए पानी दिया जा सकेगा। सिंचाई विभाग के अफसरों ने बताया कि किसानों ने 9 सितंबर को पहली बार कोडार से पानी छोड़ा गया। रोजाना 450 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, ताकि कोडार नहर के टेल एरिया तक पानी पहुंचाया जा सके। अंतिम सप्ताह में पानी मात्रा कम करते हुए 350 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कोडार बांध के अनुविभागीय अधिकारी एके बर्मन ने बताया कि कोडार बांध में 17 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर खरीफ सीजन में पानी दिया गया। वहीं रबी सीजन में लगभग तीन हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल उगाया जा सकता है।

3 साल में जिले में सर्वाधिक बारिश पर बसना में भी पानी की कमी से सूख रही फसल

बसना| बारिश की कमी से असिंचित क्षेत्र के किसान बहुत निराश हैं। कई किसानों ने अच्छी बारिश के अनुमान के बाद लंबी अवधि का धान लगाया है लेकिन एक बारिश के इंतजार में फसल सूखकर बर्बाद हो रही हैं। जिन किसानों के पास अपना सिंचाई के साधन हैं वे तो किसी तरह अपने फसल को बचाने में सफल हुए हैं लेकिन छोटे किसानों की हालत खराब है। जगदीशपुर निवासी किसान अमरुत प्रधान ने बताया कि एचएमटी, सरना, धानी आदि वैरायटी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। नवरात्रि पर्व तक बारिश होती है पर इस बार वह नहीं हुई। केवल एक पानी के अभाव में फसल नष्ट हो रही है। इधर ग्राम भस्करापाली के किसान चक्रधर पटेल ने बताया कि हमारे क्षेत्र में पिछले अगस्त महीने से बारिश छोड़ने के कारण छोटे वैरायटी के धान भी बर्बाद हो गए। उल्लेखनीय है कि बसना से सटे जगदीशपुर-पिरदा-भंवरपुर आदि क्षेत्रों में बारिश पहले ही कम हुई थी।

पिछले 3 सालों की अपेक्षा अधिक बारिश हुई (मिमी)

जिले 2018 2017 2016

महासमुंद 1069 1010 1030

ऐसे कम होता गया कोडार जलाशय का जलस्तर

1 सितंबर 88 प्रतिशत

10 सितंबर 87.6 प्रतिशत

20 सितंबर 84 प्रतिशत

30 सितंबर 76.6 प्रतिशत

10 अक्टूबर 70 प्रतिशत

24 अक्टूबर 57 प्रतिशत

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