कृषि की दो हजार सीटों के लिए 53 हजार छात्र देंगे पीएटी, हालांकि पिछले साल से एक हजार आवेदन कम

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रायपुर

प्रदेश के एग्रीकल्चर व हार्टीकल्चर कॉलेजों में दाखिला पाना इस बार भी अासान नहीं होगा। हालांकि, पिछली बार की तुलना में प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (पीएटी) के लिए कम अावेदन मिले हैं। िफर भी एक-एक सीट के लिए मुकाबला कठिन है क्योंकि करीब 2 हजार सीटों के लिए व्यापमं को 53 हजार आवेदन मिले हैं। पीएटी 30 मई को होगी।

बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के िलए इस साल साजा और खर्रा (पाटन) में दो नए कालेज शउरू हो रहे हैं। इसी साल से दोनों में 40-40 सीटों पर प्रवेश मिलेगा। इस साल प्राइवेट कॉलेजों की सीटें भी नहीं बढ़ रही हैं। इस तरह, कृषि के लिए प्रदेश में इस बार 2 हजार सीटें हैं। पिछली बार पीएटी में करीब 55 हजार आवेदन मिले थे। इस साल एक हजार आवेदन कम हैं। व्यापमं से होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में इस बार भी पीएटी की तुलना में बीएड के लिए मिले आवेदनों की संख्या ज्यादा है।

नए सत्र में शुरू होंगे दो सरकारी कॉलेज, बीएड में प्रवेश के लिए सबसे अधिक आवेदन

बीएड के लिए 55 हजार

राज्य के बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए व्यापमं से प्री-बीएड का आयोजन किया जाएगा। इन शिक्षण संस्थानों में बीएड की करीब 13 हजार सीटों पर प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम होगा। पिछली बार की तुलना में इस बार बीएड की करीब हजार सीटें कम होने की संभावना है। क्योंकि आधा दर्जन कॉलेजों पर मान्यता समाप्ति का खतरा है। इसके लिए करीब 55 हजार आवेदन मिले हैं। इस वजह से बीएड में भी एक-एक सीट पर दाखिले के लिए मुकाबला कठिन होगा। दूसरी ओर, डीएल.एड की साढ़े छह हजार सीटों के लिए 39 हजार छात्रों ने आवेदन किया हैै। बीएड व डीएल.एड 7 जून को आयोजित की जाएगी।

इंजीनियरिंग में रुझान लगातार कम

राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के प्रति छात्रों में रुझान लगातार कम हो रहा है। इस बार भी प्री इंजीनियरिंग टेस्ट (पीईटी) के लिए व्यापमं को करीब 20 हजार आवेदन मिले हैं। पिछली बार भी आवेदनों की संख्या लगभग इतनी ही थी। पिछली बार इंजीनियरिंग की करीब 16 सीटों के लिए काउंसिलिंग हुई थी। इसमें से बड़ी संख्या में सीटें खाली रही। इस साल सीटों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनकी संख्या घट सकती है।

बीएड में दिलचस्पी बढ़ी : बीएड में दाखिले के प्रति रुझान बढ़ा है। पिछली बार प्रवेश परीक्षा के लिए करीब 40 हजार आवेदन मिले थे। इस बार व्यापमं 15 हजार ज्यादा आवेदन मिले हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि बीएड काे लेकर ऐसी चर्चाएं हैं कि आने वाले बरसों में बीएड का कोर्स चार बरसों का होगा, इसलिए बीएड की डिमांड बढ़ी है। पिछली बार करीब 90 से 95 फीसदी सीटें भरी थी।

कृषि में संभावना के कारण बढ़ी डिमांड

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संचालित कृषि व उद्यानिकी कोर्स में दाखिले के लिए इस बार भी छात्रों की होड़ रहेगी। इनकी प्रवेश परीक्षा के लिए इस बार करीब 53 हजार छात्रों के आवेदन मिले हैं। पिछले कुछ बरसों से ऐसी ही स्थिति रही है। एक ओर इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, एमसीए समेत अन्य कोर्स के प्रति रुझान कम हो रहा है वहीं दूसरी ओर कृषि की डिमांड फिर कायम है। शिक्षाविदों ने बताया कि कृषि में संभावनाओं को देखते हुए छात्रों की दिलचस्पी बढ़ी है। सरकारी क्षेत्र, एनजीओ, बीज कंपनी समेत कई जगहों पर इनके लिए अवसर हैं। इसके अलावा खुद का व्यवसाय भी कर सकते हैं। इसलिए छात्रों का झुकाव कृषि के प्रति ज्यादा है।

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