राजनाँदगाँव : मणिकंचन केंद्रों से बन रही जैविक खाद आने वाले दिनों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद

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राजनाँदगाँव May 04, 2019

नगर पालिका के मणिकंचन केंद्रों में जैविक खाद तैयार हो रही है। खाद को 15 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा भी जा रहा है। हालांकि जानकारी न होने की वजह से खाद की बिक्री कुछ कम है। लेकिन आने वाले दिनों में इसकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

केंद्रों में जैविक खादों के निर्माण के लिए टंकियां बनाई गई हैं। इसमें धरमपुरा व टिकरापारा सेंटरों में खाद के लिए उपयुक्त सामाग्री को स्वच्छता दीदियों द्वारा अलग किया जा रहा है। सेंटरों में सामान्य अपशिष्ट से बनने वाले खादों के लिए अलग टंकियां व वर्मी या केचुआ खाद के लिए अलग टंकियां बनाई गई है। धरमपुरा सेंटर में अब तक 800 किलो से ज्यादा खाद तैयार कर बेचा जा चुका है। इससे 30 हजार रुपए की आमदनी हुई। केचुआ खाद के लिए पहले चरण में केंचुए की खरीदी की गई थी। लेकिन अब उन्हीं केचुओं से केचुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। वर्मी खाद के प्रचार प्रसार के लिए भी अमला खासी मशक्कत कर रहा है।

आप भी जानिए, कैसे बनती है खाद

घरों से इकट्ठा होने वाले सड़े गले खाद्य पदार्थोंं व वेस्ट खाद्य सामाग्री को टंकियों में डाला जाता है, फिर उन टंकियों में केचुओं को डाला जाता है। इन सड़े गले खाद्य अपशिष्टों को सिग्रिगेट कर टंकियों में डाले जाने व उनकी केचुओं के संपर्क में आने के बाद खाद तैैयार हो जाता है।सामान्य खाद की प्रक्रिया गांवों में होने वाले खाद निर्माण की तरह ही है। इस प्रक्रिया से बने खाद अन्य खादों की तुलना में उपयुक्त माने जाते हैं। क्योंकि इसमें कोई रासायनिक मिश्रण नहीं होता। जिसके चलते ये फसलों के लिए उपयुक्त होते हैं।

खाद तैयार कर मांग के अनुसार दिया जा रहा

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