पहली बार: कैमरे की नजर में होगी धान खरीदी कैप, कवर व सुरक्षा के लिए ढाई करोड़ का बजट

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बिलासपुर Oct 25, 2018

जिला सहकारी बैंक के अधीन आने वाली कई समितियों में इस बार सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये व्यवस्था 1 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी को देखकर बनाई जा रही है। इसकी मॉनिटिरंग का जिम्मा भी उन अफसरों को दिया गया है जो यहां प्रॉपर रहकर केंद्रों का जायजा लेते रहेंगे। धान उपार्जन केंद्रों में बारिश और धूप से बचाव और धान के रखरखाव के लिए दो करोड़ रुपए का बजट भेज दिया गया है। अपने- अपने स्तर पर समितियों को इस काम को जल्द खत्म करने की बात कही गई है। सीईओ अभिषेक तिवारी के मुताबिक 465 केंद्रों में धान खरीदी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है।

कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ के ओपन गोदामों में 100 करोड़ से ज्यादा का धान सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। मानसून के बाद हो रही बारिश से रोजाना बोरियां भींग रही थी। जिससे इनके नुकसान का खतरा बढ़ गया है। यहां के मार्कफेड के गोदामों में डंप धान की बोरियां का बुरा हाल रहा। कैप कवर और दूसरी सुविधाओं के अभाव में धान की बोरियों से बारिश का पानी रिसता नजर आया। भरनी, मोपका, मस्तूरी और सेमरताल में धान संग्रहण केंद्रों के हालात इतने खराब है कि इसकी सुरक्षा के लिए भूसे, और ब्रिक्स के इंतजाम नहीं किए गए थे। धान को देखकर साफ लगा कि कुछ दिन बाद इनकी कस्टम मिलिंग तो दूर धान जानवरों के खाने के लिए लायक भी नहीं बचेगा। इसके अलावा धान सड़ाने के मामले में बिलासपुर के अधिकारियों ने दूसरे स्थानों के अफसरों को पछाड़ दिया था। केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक यहां पिछले चार सालों में 44 हजार 731 टन धान खराब हो गया था। इसकी अनुमानित कीमत 53 करोड़ 57 लाख रुपए बताई जा रही है। दूसरे नंबर पर मुंगेली है। वहां 39 हजार 491 टन धान सड़कर बर्बाद हो चुका है। बलौदा बाजार तीसरे, दुर्ग चौथे, बेमेतरा पांचवें तो जांजगीर-चांपा छठवें नंबर पर रहा। गड़बड़ी ओपन गोदामों में रखे धान को नहीं सहेजने के चलते सामने आई। इस बार धान खरीदी के दौरान किसानों की मेहनत आसमां तले बर्बाद नहीं हो इसलिए समितियों को पैसा भेजकर अव्यवस्था को दूर करने की बात कही है।

अफसरों ने लिया संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा, कई तरह के सख्त निर्देश भी दिए

ओपन गोदामों में कुछ इस तरह धान को सहेजकर रखा जाता है।

गुजरे चार साल में कोई 250 करोड़ का नुकसान

छत्तीसगढ़ में चार साल में 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का धान सड़ा दिया गया है। उसकी अब न तो कस्टम मिलिंग हो सकती है और न ही वह इंसानों के खाने योग्य है। कुछ महीना पहले केंद्र सरकार की मांग पर ये रिपोर्ट प्रदेश सरकार ने भेजी थी। इसकी वजह समितियों से समय पर उठाव नहीं होने, संग्रहण केंद्रों में बदइंतजामी, कस्टम मिलिंग में देरी बताई जा रही। इस बार ऐसी स्थिति निर्मित नहीं हो इसके लिए ही यह प्लानिंग तैयार की जा रही है।

संवेदनशील जगहों पर लगेंगे कैमरे नहीं होगी पहले जैसी कोई परेशानी


इन अव्यवस्था को देखकर तैयार की गई पूरी योजना

धान खरीदी केंद्रों पर कई तरह की शिकायतें आम हो चली हैं। किसी समिति में प्रत्येक बोरे पर कांटा मारने तो कहीं बोरे को पलटाने की शिकायत मिल रही है। कुछ साल पहले कलेक्टर और सीईआे ने कई स्थानों का दौरा किया था। इसमें उन्हें लापरवाही मिली थी। इसके बाद संबंधित के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए लिखा गया। इसके बाद से अफसरों का समितियों में दौरा कम हो गया है। इसके कारण कई केंद्रों में किसानों को उनकी मेहनत का लाभ नहीं मिल रहा है।

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