रबी में 20 दिन की देर से बढ़ सकती है महंगाई

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रायगढ़ Dec 05, 2019

धान कटाई के बाद खरीदी में देर होने से रबी फसल का चक्र बिगड़ेगा। जिले में 15 नवंबर तक रबी की फसलें लग जाती हैं लेकिन इस बार धान खरीदी ही 1 दिसंबर से शुरू हुई। किसान कटाई, मिसाई में लगे रहे। वहीं कुछ किसान समर्थन मूल्य मिलने के बाद रबी की तैयारी करते हैं। खरीदी देर से होने के कारण अब तक रबी की फसल नहीं लगा सके हैं। किसानों का कहना है कि धान बेचने के बाद जो पैसा मिलेगा उससे पानी का इंतजाम करेंगे तब रबी की फसल लग सकेगी। जिन किसानों ने धान बेचा है उन्हें भी अब तक पैसे नहीं मिले हैं। विशेषज्ञ प्रो एके सिंह मानते हैं कि इस देर का असर रबी के उत्पादन पर पड़ेगा।

रबी फसल क्यों जरूरी. रबी फसल में आलू, प्याज, गेहू, धान, मूंगफल्ली, झुनगा दाल, तलहन, दलहन एवं सब्जियों की भी खेती इसमें की जाती है। किसान इन फसलों के लिए बोर पंप, तलाब और बांध से पानी लेते हैं। आसपास के इलाकों से गेहूं, दाल, धान और सब्जियां मार्केट में आती हैं तो कीमतें सामान्य रहती हैं। उत्पादन नहीं होगा तो महंगाई बढ़ेगी।

बीज और पानी के लिए पैसे नही. कोड़ातराई के प्रहलाद सोनी कहते हैं, धान बेचने के बाद भी पैसा एकाउंट में नहीं आ रहा है। रबी फसल पर खर्च करने लायक पैसे ही नहीं हैं। कोई भी फसल लगाते हैं तो उसमें खाद्य बीज के साथ पानी की ज़रूरत होती है और खेतों की सफाई करानी होती है। खाते में पैसा आता है तभी कुछ करने के लिए सोचा जा सकता है।

सिर्फ 18 फीसदी ही खेती हो सकी

कृषि विभाग इस साल 3 लाख 122 हेक्टेयर जमीन पर रबी की फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में 32 हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में रबी की फसल लगाई जानी है लेकिन अभी तक 18 फीसदी किसान ही रबी की फसल लगाई है। अभी करीब ढ़ाई लाख एकड़ जमीन में फसल लगना बाकी है। इस बार टारगेट पूरा नहीं हो सकेगा। रबी की फसल में जिले में तिलहन, मूंग, उड़द, मंुगफली और गेहूं का उत्पादन होता है।

दाल के कीमत पर असर पड़ेगा

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