शुरुआत में अच्छी बारिश पर आखिर में फसलों को पानी नहीं मिला, 54 हजार किसानों को नुकसान

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रायगढ़ Nov 14, 2018

बीते साल सूखे की स्थिति से गुजरे किसान इस बार शुरुआत में अच्छी बारिश होने पर खुश थे। अनुमान था कि धान की एमएसपी बढ़ने व बोनस एक साथ मिलने से पिछली बार जो नुकसान हुआ था। इसकी भरपाई हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि जरूरत के समय बादल बरसे ही नहीं।

जिन किसानों के पास सिंचाई सुविधा है उन्होंने तो जैसे तैसे कर कुछ हद तक अपनी फसलें बचा ली, मगर जिनके पास पानी की कोई सुविधा नहीं है अब उन गांवों के किसानों को खेतों में लगे धान की फसल को काटने की जरूरत ही नहीं है। ऐसे गांवों की संख्या बरमकेला, लैलूंगा और पुसौर ब्लॉक में ज्यादा है।

खरीफ में धान की पैदावार व कटाई के बाद कृषि विभाग ने नजरी अनावारी की जो रिपोर्ट शासन को भेजी है उसमें रायगढ़ जिले की 9 तहसीलों से 54 हजार किसानों को नुकसान होना बताया गया है। साथ ही 40 हजार हेक्टेयर धान के रकबे में सूखे का असर बताया है, लेकिन चुनावी साल में सूखे की संकट से गुजर रहे किसानों पर ध्यान न तो राजनैतिक पार्टियों को है न ही जिला प्रशासन के अफसरों को। भू अभिलेख विभाग के रिकार्ड पर गौर करें तो बीते साल की अपेक्षा इस बार औसत से 16 प्रतिशत कम बारिश हुई और 9 में से 8 तहसीलों में बीते 10 सालों के मुकाबले 18 से 32 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई। बारिश नहीं होने के बावजूद सिंचिंत रकबे वाले किसानों ने अपनी धान की फसल तो बचा ली है, लेकिन जो असिंचित रकबे वाला धान का रकबा था।

वहां किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। अक्टूबर माह में जब फसल पकने लगी तो एक या दो बारिश की जरूरत थी, किसानों ने उम्मीद लगाई थी कि बारिश हो जाए तो कुछ राहत मिल सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब किसानों की फसलें सूखने लगी तो राज्य सरकार ने जिले से रिपोर्ट मांगी थी। कृषि विभाग ने रायगढ़ की सभी तहसीलों की धान की नजरी अनावारी वाली रिपोर्ट बनाई।

वो चौकाने वाली आई है। शासन को भेजी गई इस रिपोर्ट के अनुसार जिले में धान के 2 लाख 24 हजार हेक्टेयर के कुल रकबे में से 39 हजार 980 हेक्टेयर रकबे में सूखे का असर दिखने लगा है। अलग अलग तहसीलों से आई इस रिपोर्ट में जिले में करीब 54 हजार किसानों को नुकसान होना बताया गया है। अब सरकार को इन किसानों को बीमा क्लेम एवं आरबीसी के तहत मुआवजा देना पड़ सकता है।

बरमकेला के खेत में धान की ऐसी स्थिति हो गई है।

बारिश कम होने से कहां कितना नुकसान

तहसील किसानों की संख्या प्रभावित रकबा हे. में नुकसान % में

कुल 54 हजार 45 किसान 39 हजार 981 हेक्टेयर रकबा

बरमकेला ब्लॉक के इन गांवों में स्थिति अधिक खराब

सबसे ज्यादा नुकसान पुसौर, लैलूंगा व बरमकेला ब्लॉक के किसानों को बारिश नहीं होने से हुआ है। जिसमें बरमकेला ब्लॉक के मंजूर पाली, जगदीशपुर, छिंदपतेरा, अकबरटोला, केरमेली, अमलीपाली, कर्रामाल, खम्हरिया, कालाखूंटा, जोगनीपाली, विष्णुपाली, छैलभांठा, ढोसरबहाल, गौरडीह, घोघरा, संडा, देवगांव सहित अन्य दर्जनों गांव है जहां किसानों को फसल काटने की जरूरत ही नहीं है।

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