छत्तीसगढ़ / यहां से निकली खाद जाएगी बाड़ी में, घुरवा में ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी और नरवा से हटाएंगे सिल्ट, बनाए जाएंगे स्टॉप डैम

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रायपुर May 06, 2019 

‘नरवा, गरुवा, घुरवा और बारी’ के ड्रीम प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने कार्य करना शुरू कर दिया है। पहले चरण में सभी जिलों को 15 फीसदी गांवों में गौठान बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन क्षेत्र पाटन के गांव पहंदा में मॉडल गौठान बन रहा है, जो एक तरह से गाय-बैलों के लिए डे केयर सेंटर होगा। यहां चारा, पानी के साथ छाया की भी सुविधा होगी। यहां गांव के मवेशी दिनभर रहेंगे। यहां पशुओं के लिए टीकाकरण सुविधा भी होगी। आधुनिक गोठान में गोबर खाद के अलावा वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जाएगा। इसे ग्रामीणों को ही खेत व बाड़ियों में डालने के लिए दिया जाएगा। इसका फैसला सरपंच की अध्यक्षता में बनी गौठान समिति करेगी। गौठान के भीतर गाय रहने से किसान दूसरी फसल ले सकेंगे। अभी तक ज्यादातर गांवों में खरीफ फसल के बाद गायों को खुला छोड़ दिया जाता है। इस वजह से छोटे किसान जो अपने खेतों को नहीं घेर सकते, वे तिवरा, अरहर की फसल नहीं ले पाते।

पहले चरण में 1500 गांवों में गौठान  : पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा से नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी योजना चलाएगी। राज्य में 10 हजार ग्राम पंचायतें हैं। पहले चरण में 15 फीसदी यानी करीब 1500 ग्राम पंचायतों में गौठान बनाए जाएंगे। इसका काम अप्रैल तक पूरा करने की तैयारी है। पाटन क्षेत्र के पहंदा में बन रहे गौठान का आचार संहिता के बाद मुख्यमंत्री उद्घाटन करेंगे।

ये चुनौतियां भी…

  • ज्यादातर गांवों में गोठान की जमीन पर कब्जा हो चुका है। इसके लिए नई जमीन तलाशनी होगी। {बारी योजना की बड़ी चुनौती यह है कि गांवों में ज्यादातर बाड़ियां खत्म हो चुकी हैं।
  • नदियों के स्टॉपडैम सूखे पड़े हैं। ऐसे में नालों में स्टॉपडैम और चेकडैम की उपयोगिता पर संशय है। {ग्रामीण स्तर पर बनने वाली समितियों की सफलता की उम्मीद कम ही होती है। इसमें भी पंचायत स्तर पर समितियां बननी हैं।
  • मनरेगा में अक्षय चक्र का कॉन्सेप्ट फ्लॉप हो चुका है। यह भी बारह महीने फसल और खाद को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।

नरवा | नालों पर बनाएंगे स्टॉप, चेक डैम : गांव से लगकर बहने वाले नालों पर सिल्ट जमने के कारण अब गर्मी के दिनों में पानी नहीं रहता। पहले सिल्ट हटाई जाएगी, फिर उस पर स्टॉपडैम या चेकडैम बनाने की योजना है। इससे बारिश का पानी रुकेगा और जलस्तर बना रहेगा।
घुरवा| कचरा फेंकने की जगह पर बनाएंगे नाडेप टैंक : गांवों में घरों के सामने या बस्तियों के पास ही गड्‌ढे में कचरा फेंका जाता है। इसे नाडेप टैंक का रूप दिया जा रहा है, जिससे ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी। इसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में होगा। इससे यूरिया की खपत कम होगी और पौष्टिकता बढ़ जाएगी।

बाड़ी |सब्जियों के बीज उद्यानिकी विभाग से : सब्जियों के बीज की कीमत ज्यादा होने के कारण परंपरागत तरीके से बाड़ियों में (कोला-बारी) अब खेती नहीं हो रही। उद्यानिकी विभाग से बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे लोग ताजी सब्जियां खा सकें या ज्यादा उत्पादन कर बेच सकें।

जीवन स्तर सुधरेगा, गाय भी पाल सकेंगे ग्रामीण 

नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी योजना से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। मॉडल गौठान को इस तरीके से बनाया जा रहा है, जहां गाय-बैल और बछड़ों को पर्याप्त चारा-पानी मिलेगा। ऐसे लोग जिनके घरों में जगह नहीं है, लेकिन गौपालन करना चाहते हैं, वे भी गौठान में गाय-बैल रख सकेंगे। इसके लिए गौठान समिति को भुगतान करना होगा।

रूपेश पाण्डेय, सीईओ जनपद पाटन

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