पंजीयन की दोबारा जांच के नाम पर किसानों का रकबा कर दिया शून्य, नहीं बेच पा रहे धान

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राजनाँदगाँव Dec 14, 2019

पंजीयन की दोबारा जांच के नाम पर पटवारियों ने घर बैठे ही खेती का रकबा कम कर दिया। कुछ जगहों पर तो रकबा शून्य कर देने की वजह से किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। कन्हारपुरी और लखोली क्षेत्र के प्रभावित किसानों ने तो एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर गिरदावरी रिपोर्ट की जांच कराने की मांग रखी है।

शिकायत सामने आने पर प्रशासन ने कुछ किसानों के रकबे में सुधार कर दिया पर अन्य किसान आज भी चक्कर लगाने मजबूर हो गए हैं। हल्का पटवारी का कहना है कि यह मेरी गलती नहीं है बल्कि फूड एवं समितियों ने जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है, उसकी तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऐसा हुआ है। किसानों ने बताया कि जिस रकबे में हेरफेर किया गया है, उसमें कई सालों से खेती करते आ रहे हैं। इन रकबों में धान की खेती होती है।

रकबे में हेरफेर: अब मंडी में धान बेचने मजबूर हैं किसान

राजनांदगांव. धान खरीदी केन्द्रों में 10 हजार क्विंटल से ज्यादा खरीदी हो गई है। जगह की कमी हो रही।

टोकन ही नहीं मिला है

इसी रकबे के आधार पर खरीदी केन्द्र में धान बेचते आ रहे हैं पर इस बार गड़बड़ी कर दी गई है। बताया कि जब टोकन लेने गए तब पता चला कि रकबा ही शून्य कर दिया गया है तो कुछ किसानों का रकबा कम हो गया है और टोकन जारी नहीं किया गया है। खरीदी केन्द्र प्रभारी ने ऑनलाइन इंट्री व गिरदावरी के आधार पर रकबा शून्य होने के कारण टोकन देने से मना कर दिया।

लाभ नहीं मिल पाएगा

किसानों ने आवेदन देकर रकबा की गई कटौती की सुधार कराने की मांग रखी तब उक्त हल्का नंबर के पटवारी ने उच्चाधिकारियों ने मार्गदर्शन लेकर कुछ किसानों की रकबा सुधार किया पर रकबा सुधारा नहीं गया है। किसान पितांबर दास साहू, रोहित साहू, लखन साहू ने बताया कि रकबे में सुधार नहीं हुआ तो समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाएगा।

प्रक्रिया में हो रही देरी

अफसरों ने बताया कि जिन किसानों का रकबा शून्य बता रहा है, उनकी सूची तैयार कर शासन को भेजा गया है। सूची का सुधार शासन स्तर पर होना है। इस वजह से किसान चिंता में है। दरअसल शासन स्तर पर सुधार होने में अभी समय लगेगा। यानी की किसानों को अभी धान बेचने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

प्रबंधक ही झेलेंगे नुकसान

हर बार की तरह मार्कफेड की ओर से परिवहन अब तक शुरू नहीं किया गया है। जबकि केन्द्रों में 10 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। जगह की कमी होने लगी है। सप्ताहभर तक ऐसी स्थिति रही तो खरीदी बंद करने की नौबत आ जाएगी। इस बार वाहनों में जीपीएस लगाया जाएगा ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके।

सुधार कर चुके हैं


प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी

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