धान को 120 सेंमी पानी की जरूरत 94 सेमी ही हुई बारिश, तालाब व बोर से करने लगे सिंचाई

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रायगढ़ | Oct 05, 2018

जिले में बारिश की शुरुआत अच्छी हुई थी लेकिन बाद में हल्की हो गई। अब 20 दिनों से बारिश ही नहीं हुई है। फिलहाल कई क्षेत्रों में जरूर खंड वर्षा हुई। इसका असर अब धान की खेती पर पड़ने लगा है। सरिया, बरमकेला, सारंगढ़, तमनार, घरघोड़ा व खरसिया के कई हिस्से में खेत पूरी तरह सूख गए हैं। धान की फसल के लिए 120 सेंटीमीटर पानी की जरूरत होती है पर अब तक 94 सेंटीमीटर बारिश ही हो पाई है। लगभग 62 प्रतिशत खेतों में पानी नहीं है। एक सप्ताह के भीतर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन की उम्मीद भी नहीं रहेगी। बीते साल इतनी ही बारिश इस वर्ष भी हुई है।

भू अभिलेख विभाग के आंकड़ों की माने तो जिले में औसत का 85 प्रतिशत पानी ही गिरा और जिले के 9 में से 7 तहसीलों में औसत से कम बारिश हुई है। लेकिन जिले में इस बार सूखा नहीं माना गया है। जबकि हालात बीत साल से भी खराब हो रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारी ऑल इज वेल बता रहे हैं। अगर जिला प्रशासन सूखे से निपटने की योजना और सूखा ग्रस्त घोषित नहीं करेगी तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में प्रदेश व केंद्र की भाजपा सरकार के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है।

खेत में लगी धान की फसल को सिंचाई बोर से करते हुए।

बोर पंप और तालाबों से करने लगे सिंचाई

किसान धान की फसल को बचाने के लिए नदी-नालों, बोर पंप व तालाबों में पंप लगाकर सिंचाई करने लगे हैं। इसका लाभ वही किसान उठा सकते हैं जिनके खेत नजदीक हैं या फिर जिनके पास बोर पंप की सुविधा है। बरमकेला ब्लॉक के रंगाडीह निवासी संजय चौधरी ने बताया कि एक माह से बारिश नहीं हुई है। इसकी वजह से बांकी व पंसोक बीमारी लग गई थी। वहीं मंजूर पाली के उद्धव पटेल ने बताया कि महीने से बारिश थम सी गई है। जिसके कारण खेत सूख गए हैं। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो धान उत्पादन पर असर होने की बात कही। बहरहाल किसान धान को बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

2 लाख 24 हजार हेक्टेयर में खेती सिंचाई सुविधा 1 लाख 92 हजार में

कृषि विभाग के आंकड़ों की माने तो जिले में खरीफ फसल का रकबा 2 लाख 97 हजार 610 हेक्टेयर है। इसमें लगभग 2 लाख 24 हजार 4 सौ हेक्टेयर में किसान धान की फसल लेते हैं। वहीं शेष में दलहन व तिलहन लगाते हैं। 2 लाख 24 हजार 4 सौ हेक्टेयर में सिंचाई मात्र 1 लाख 92 हजार 655 हेक्टेयर हैं। इतनी खेतों में नहर से पानी 48 हजार 170 हेक्टेयर, तालाबों से 26 हजार 515 हेक्टेयर, कुंआ से 35 सौ हेक्टेयर, नलकूप से 60 हजार 151 हेक्टेयर, नदी, नाला व डबरी से 54 हजार 389 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा होने का दावा किया जा रहा है।

सभी क्षेत्रों में हालत खराब, पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति गंभीर

जिले के 9 में से 7 तहसीलों में औसत से 15 से 30 फीसदी तक कम बारिश हुई है। इसकी वजह से सभी क्षेत्रों के किसानों द्वारा खेतों में सिंचाई के लिए संसाधन जुटाने में लगे है। मगर स्थिति पहाड़ी व जंगली क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर है। क्योंकि गर्मी अधिक पड़ने की वजह से खेत जल्द सूख रही है। पानी सिंचित करने के बाद भी दो से तीन दिनों में दोबारा जरूरत पड़ रही है। एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो लगातार तीसरे साल किसानों का नुकसान उठाना पड़ेगा।

जलाशयों में भी पर्याप्त पानी नहीं

जिले के छोटे बड़े समेत पांचों जलाशयों में भी पर्याप्त पानी नहीं है। इससे जलाशयों से किसानों को पानी मिलना मुश्किल है। केलो डैम में मात्र 76.46 प्रतिशत ही पानी भरा है। इसके अलावा खम्हार पाकुट में 48.79, केडार जलाशय 41.25, किंकारी डेम 82.25 तो पुटका नाला में 43.10 प्रतिशत ही जलभराव है। केलो डैम में बीते साल 4 अक्टूबर की स्थिति तक 92 प्रतिशत तक पानी भरा था। इस बार मात्र 76 प्रतिशत ही जलभराव होने की वजह से सिंचाई का रकबा 7 हजार एकड़ तक सिमट गया है।

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