डोकरीखेड़ा डेम में नहीं है पर्याप्त पानी, किसानों को पलेवा का संकट

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पिपरिया Oct 15, 2018

कम बारिश का असर डोकरीखेड़ा बांध पर पड़ा है। बांध में इतना पानी ही नहीं है कि किसान पलेवा कर सकें। जल संसाधन विभाग ने कहा है जो पानी है उसे अगर छोड़ा भी गया तो सभी किसानों को नहीं मिल पाएगा और रास्ते में ही सूख जाएगा। पिपरिया के दक्षिणी भाग में डोकरी खेड़ा बांध बना है। इस बार बांध में सिंचाई के लिए पानी नहीं है। जल संसाधन विभाग के एसडीओ रामावत ने बताया इस वर्ष बारिश बहुत कम होने के कारण ना तो घोगरा नाला से पानी मिल पाया है और ना ही पूर्ति बांध से यही कारण है कि वर्षा आधारित यह बांध पानी की कमी को झेल रहा है। जल संसाधन विभाग के ही सब इंजीनियर जीपी पटेल ने बताया कि बांध में जो पानी है उसकी जानकारी हमारे द्वारा जिला प्रशासन को दे दी गई है।

बांध में से 1.31 मिलियन घन मीटर पानी लिया जा सकता है जो पलेवा के लिए अपर्याप्त होगा। उन्होंने बताया इसके अलावा पेयजल और जानवरों के लिए भी पानी का भंडारण रखना होता है। इस बारे में वरिष्ठ अधिकारी तय करेंगे की पानी दिया जा सकता है या नहीं। श्री पटेल के अनुसार डेम में जो पानी है वह खेतों तक शायद ही पहुंच पाए। यही नहीं पानी कम होने के कारण किसानों के बीच आपस में कोई विवाद की स्थिति ना बने हमें इसका ध्यान भी रखना है। डोकरी खेड़ा बांध से डॉग का सिमारा, खैरीकला, तरौनकला, बरुआढाना, घोघरी, समनापुर, पनारी, कल्लूखापा, बोडना, छोटी तरौन, उमरिया जैसे कई गांव के किसान खेती के लिए पानी लेते हैं।

मक्का किसानों की अच्छी फसल, सोयाबीन बर्बाद

पिपरिया| सोयाबीन में बीमारी और धान में पानी की कमी से परेशान क्षेत्र के अनेक किसानों ने इस बार मक्के पर दांव लगाया और उनकी बल्ले-बल्ले हो गई है। किसानों का कहना है कि इस बार जहां सोयाबीन ने हमेशा की तरह धोखा दिया है वहीं धान किसान पानी के लिए परेशान हैं। दूसरी तरफ मक्का किसान फसल के साथ खुश नजर आ रहे हैं।

युवा कृषक रितेश कटकवार ने बताया कि इस बार उन्होंने बड़े पैमाने पर मक्के की खेती की है। उन्होंने बताया कि आधुनिकतम तकनीक का सहारा लेकर की गई खेती के कारण मक्के की अच्छी फसल हुई है। उन्होंने बताया कि उनके आसपास के किसानों ने भी मक्का लगाया है। कृषि विशेषज्ञ एलके पवार ने बताया कि धान और सोयाबीन के विकल्प में किसानों ने मक्के की फसल को अपनाया है। मक्के में कोई बड़ी बीमारी का खतरा नहीं होता और धान के मुकाबले पानी भी कम लगता है।

पिपरिया। जगह-जगह सूखा पड़ा डोकरीखेड़ा डेम।

मक्का खेती करने किसानों को किया जागरूक

सोहागपुर| शुक्रवार को चंदू रघुवंशी के खेत में लगी मक्का की फसल देखने के लिए करीब 90 किसान एकत्रित हुए। पायनियर मक्का कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी प्रहलाद सैनी एवं धीरेंद्र राजपूत ने मक्के का एवरेज किसानों को दिखाने के लिए फसल कटाई प्रयोग किया। 5 गुणा 5 मीटर में काटे गए मक्के का वजन 31 किलो आया। किसान ने 8 एकड़ में मक्का लगाया था। एवरेज के मुताबिक करीब 240 क्विंटल मक्का की पैदावार होगी। इस लिहाज से करीब 4 लाख रुपए के मक्का की पैदावार होगी। किसानों ने भी मक्का की फसल की सराहना करते हुए आगामी समय में मक्का लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पानी के अभाव में धान की फसल रिस्की होती है। मक्का लगाना बेहतर विकल्प रहेगा।

हालात हो सकते हैं खराब

डोकरीखेड़ा बांध से जिस क्षेत्र के किसान पानी लेते हैं वहां ट्यूबवेल सफल नहीं है। पथरीली और सूखी जमीन होने के कारण किसान ट्यूबवेल नहीं खुदवाते हैं। किसान बारिश और बांध के पानी पर ही निर्भर हैं। जल संसाधन विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों को एक प्रस्ताव भेजा है इसमें तवा बांध की बड़ी नहर से निवारी ग्राम के पास से पाइप लाइन के द्वारा डोकरीखेड़ा डेम में पानी लाया जा सकता है। बारिश के दौरान जब बांध के गेट खोले जाते हैं और अतिरिक्त पानी बहता है उस पानी को डोकरीखेड़ा बांध में लाकर उसका उपयोग किसानों के लिए किया जा सकता है।

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