औसत से 8 इंच कम हुई बारिश 7 तहसीलों में सूखा की स्थिति

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Oct 18, 2018

दस साल की औसत वर्षा से इस बार 8 इंच कम बारिश हुई है। किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। इसलिए चौपालों पर चर्चा भी शुरू हो चुकी है। पिछले साल सूखे के बावजूद 960 मिमी बारिश हुई थी जबकि इस साल अब तक 942 मिमी पानी गिरा है। बारिश कम होने के कारण 50 प्रतिशत खेतों की फसलें चौपट होने के कगार पर हैं। ऐसे में किसानों द्वारा सिंचाई करने के लिए बोरवेल से 200 रुपए प्रति घंटे की दर से पानी खरीद रहे हैं।

22 सितंबर के बाद शहर व जिले में बारिश नहीं हुई है। जिले में अब तक 942 मिमी ही बारिश हुई है जो खेती के लिए कम है। अक्टूबर के पहले सप्ताह अगर बारिश होती तो स्थिति इतनी चिंताजनक नहीं होती पर अभी तक बारिश का पता नहीं, इसलिए अब परिस्थिति किसानों के लिए अनुकूल नहीं है। खरसिया, लैलूंगा, सारंगढ़, बरमकेला, घरघोड़ा, तमनार, धरमजयगढ़ में स्थिति खराब है। खेतों में पानी सूख चुका है, जिससे बड़ी-बड़ी दरारें दिखने लगी हैं। पानी के बाद अब धान की फसल के सूखने की बारी है। यदि बारिश नहीं हुई तो फसल सूख जाएगी और उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा। शेष |

दस वर्ष की औसत बारिश के मुताबिक अब तक जिले में 1147 मिमी वर्षा होनी थी, पर 203 मिमी यानी 8 इंच से कम बारिश हुई है। पिछले साल सूखे के बावजूद 960 मिमी बारिश हो चुकी थी। अक्टूबर का आधा महीना खत्म हो चुका है। सितंबर में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई गई थी, इसके बाद तितली तूफान के समय भी बारिश होने के आसार थे, लेकिन बारिश नहीं हुई। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

तमनार में सबसे कम बारिश

अब तक तमनार तहसील में सबसे कम बारिश हुई है। यहां 730 मिमी पानी गिरा है। वहीं सबसे ज्यादा पुसौर में 1426 मिमी बारिश हुई है। तमनार में पिछले साल सूखा पड़ा था। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव होने के कारण अफसरों का ध्यान नहीं इसलिए सूखा घोषित करने की घोषणा होगी या नहीं असमंजस है।

जलाशयों में भी पर्याप्त पानी नहीं

जिले के छोटे बड़े समेत पांचों जलाशयों में भी पर्याप्त पानी नहीं है। इससे जलाशयों से किसानों को पानी मिलना मुश्किल है। केलो डैम में मात्र 76.46 प्रतिशत ही पानी भरा है। इसके अलावा खम्हार पाकुट में 48.79, केडार जलाशय 41.25, किंकारी डेम 82.25 तो पुटका नाला में 43.10 प्रतिशत ही जलभराव है। केलो डैम में बीते साल 4 अक्टूबर की स्थिति तक 92 प्रतिशत तक पानी भरा था। इस बार मात्र 76 प्रतिशत ही जलभराव होने की वजह से सिंचाई का रकबा 7 हजार एकड़ तक सिमट गया है।

वर्सन

विधानसभा चुनाव के कारण खेतों का नहीं हो रहा सर्वे, 40% किसान 200 रुपए खर्च कर बोरवेल से खरीद रहे पानी

अब आगे क्या संभावना. सूखे का एलान शासन ने किया तो किसानों को सहायता देनी होगी। 2015 और 2017 की तरह इसमें किसानों को फसल बचाने व सिंचाई करने डीजल सब्सिडी दी जा सकती है। मनरेगा में भी पहले से ही काम तैयार रखने के निर्देश शासन ने दे रखे हैं। किसानों द्वारा लिए गए लोन की रिकवरी पर भी आंशिक रूप से रियायत दी जा सकती है।

बारिश नहीं होने पर क्या कहते हैं प्रभावित किसान

केस-1. खरसिया तहसील के डूमरपाली निवासी सतीश साहू का कहना है कि लगातार तीन वर्षों से कम बारिश हो रही है। इस बार भी अंतिम समय में बारिश थमने से फसल खराब होने का डर है। इस बार फसल खराब हुआ तो किसानों की कमर ही टूट जाएगा। बीज, खाद के लिए कर्ज लेते हैं। वह भी वापस मिलना मुश्किल हो जाता है।

केस-2. पुसौर तहसील के सुभाष साहू का कहना है कि खेतों में सरना धान लगाए हैं। इस वेरायटी की फसल के लिए अभी पानी की जरूरत है। बारिश नहीं होने से फसल खराब होने का खतरा है। किसानों को नुकसान हो सकता है। लंबे समय बाद इस बार एक माह तक बारिश नहीं हुई है। खेत सूख चुके हैं।

50% फसल हो चुकी हैं बर्बाद

भास्कर टीम ने पुसौर, तमनार, सारंगढ़ के किसानों से बातचीत की। दर्रा मुड़ा के खेत में पानी नहीं मिला। किसानों ने बताया उनकी 50% फसल मर चुके हैं। शेष को बचाने के लिए दूसरे के बोरवेल से पानी खरीद रहे हैं। अब तक एक एकड़ में 5 से 7 हजार रुपए तक खर्च कर चुके हैं। इसमें रोपा, खाद, मजदूरी, दवा छिड़काव का खर्च शामिल है। जिले के प्राय: सभी तहसीलों में यही हालात हैं।

खेतों का सर्वेक्षण कराया जाएगा


जलाशयों से पानी छोड़ा गया है 

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