गंभीर लबालब होने से दस गांवाें के किसानों की चिंता खत्म भू-जलस्तर बढ़ने से कर सकेंगे बोरवेल और कुओं से सिंचाई

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उज्जैन | Sep 25, 2018

गंभीर डेम लबालब होने से क्षेत्र के दस गांवों के किसानों की चिंता खत्म हो गई है। भू-जलस्तर में बढ़ोतरी होने से उनके बोरवेल और कुआें में पानी बढ़ने लगा है। जिससे वेे रबी की फसल में आसानी से सिंचाई कर सकेंगे। भूजल विदों का कहना है कि किसी भी बड़े जलस्रोत के आस-पास भूजल का स्तर अच्छा रहता है। गंभीर डेम पूरी क्षमता (2250 एमसीएफटी) से भर गया है। जिससे शहर की पेयजल समस्या हल हो गई है। साथ ही किसानों को खेती के लिए पानी मिलने लगेगा।

खरीफ फसल में औसत बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। किसानों का कहना है कि खरीफ फसल में ऊपरी सिंचाई की जरूरत नहीं होती लेकिन रबी की फसल पूरी तरह से बोरवेल, कुओं पर निर्भर रहती है। इन जलस्रोतों में पानी नहीं होगा तो रबी में सिंचाई करना मुश्किल हो जाएगा। जिसका असर फसल की पैदावार पर पड़ेगा। गंभीर में पर्याप्त पानी आने से अब सिंचाई की समस्या नहीं होगी। नवंबर में लगाई रबी की फसलों को उसी महीने से मार्च के आखिरी तक पानी की जरूरत होती है। इसके लिए बोरवेल और कुओं में पानी होना जरूरी है। जब क्षेत्र के किसान एक साथ सिंचाई करते हैं तो भूजल स्तर में गिरावट आने लगती है। शहर को जलप्रदाय करने वाले मुख्य स्रोत गंभीर डेम में 23 माह 6 दिन बाद 2250 एमसीएफटी पानी आ गया है। डेम के गेट खोलने के बाद फिर से बंद कर दिए हैं लेकिन पानी आने से क्षेत्र के भूजल स्तर में बढ़ोतरी होगी। पीएचई अफसरों का कहना है कि गंभीर डेम में जितना पानी संग्रहित हुआ है उसमें से कैचमेंट एरिया से 1200 एमसीएफटी और 1050 एमसीएफटी यशवंत सागर से आया है। गंभीर डेम पूरी क्षमता से भरने से शहर की पेयजल समस्या हल हो गई है। गंभीर में 2250 एमसीएफटी में से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज का माना जाता है। इस तरह 2150 एमसीएफटी पानी संग्रहित हो गया है। ऐसे में 8 एमसीएफटी रोज जलप्रदाय किया जाए तो 268 दिनों तक सप्लाय किया जा सकता है।

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