जैविक खेती से कम लागत में मक्का, फली और बरबटी की कर रहे खेती, किसान कमा रहे मुनाफा

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जिले में किसानों द्वारा जैविक खाद का उपयोग कर खेतों की उर्वरा शक्ति के अलावा ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं। दर्जनभर किसानों ने इस साल तो कई पहले से जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं।

नगर पालिका द्वारा कचड़ा को गला कर बनाए गए खाद को किसान खरीद कर खेतों में डाल रहे हैं। वहीं कुछ किसान घर पर ही जैविक खाद बना कर खेतों धान सहित सब्जी की पैदावार कर रहे हैं। इससे फल, सब्जी सहित धान की मिनरल्स अधिक समय तक बने रहने की बात कृषि वैज्ञानिक कर रहे हैं। जिले के किसान अब रासयनिक खाद को छोड़ जैविक खाद का उपयोग कर खेती कर रहे हैं। किसानों के अनुसार जैविक खाद को खेतों में डालने के कारण खेतों की उर्वरक क्षमता के साथ-साथ अनाज का उत्पादन भी बढ़ता है। नपा से लगे गांव कटोलीपारा, नगर पालिका वार्ड क्रमांक 17 केनापारा, जूनापारा, तलबापारा सहित अन्य जगहों के किसान अब धीरे-धीरे जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं।

जिला मुख्यालय के किसानों से अंचलों के किसान भी हो रहे प्रेरित

अंगूर की फसल को दिखाता किसान।

जैविक खाद के उपयोग से खेतों में बनी रहती है उर्वरा शक्ति

वहीं इनमें से केनापारा व कटोलीपारा के किसान रामभजन राजवाड़े, जितेन्द्र, भरत राजवाड़े, बुद्ध राजवाड़े श्याम लाल नाविक, सुनील कुमार ने बताया कि जैविक खाद का ज्यादा उपयोग करने के गई फायदे हैं। पहला तो खेतों की उर्वरा शक्ति हमेशा बनी रहती हैं। दूसरा इसके लिए भटकना नहीं पड़ता है। घर में ही मवेशियों के गोबर व खरपतवार को सड़ा कर खाद बना लेते हैं। जिसकी लागत बेहद कम होती हैं। खाद की लागत कम होने से धान औ सब्जी का उत्पादन की लागत कम हो जाती हैं। वहीं नपा द्वारा एसएलआरएम सेंटर में बनाया गया जैविक खाद को 50 रुपए बोरी में मिल जाता हैं।

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