भाड़ा व हम्माली भी नहीं निकल रही, मंडी में ही टमाटर फेंक कर जा रहे किसान, फूलगोभी के भी यही हाल

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खंडवा | Sep 22, 2018

सोयाबीन सहित अन्य रबी-खरीफ फसलों में हो रहे नुकसान से आजिज आए किसानों ने सब्जी उत्पादन की ठानी, लेकिन यह भी घाटे का सौदा साबित हो रहा है। मंडी में उन्हें टमाटर के सही भाव नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी उत्पादन लागत तो छोड़िए हाल यह है कि टमाटर खेत से मंडी तक लाने का भाड़ा और हम्माली तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में किसान क्विंटलों टमाटर मंडी में ही फेंक कर जा रहे हैं। फूलगोभी के भी यही हाल है।

शुक्रवार को पंधाना रोड स्थित सब्जी मंडी में कई किसान टमाटर फेंक गए। ये आवारा मवेशियों का आहार बने। यहां एक तरफ टमाटर के ढेर लगे थे तो दूसरी तरफ कचरे के ढेर पर फूलगोभी के बंधे-बंधाए पैकेट पड़े थे। सब्जी मंडी में रोजाना करीब 100 किसान टमाटर लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन पिछले हफ्ते भर से उन्हें यहां सही भाव नहीं मिल रहे हैं। 20 से 30 रुपए प्रति कैरेट के भाव लगाने पर वे इसे बेचने के बजाय फेंकना मुनासिब समझ रहे हैं।

एक एकड़ में फसल लगाने पर करीब 60 हजार रुपए खर्च

बंजारी के किसान दिलीप पटेल ने बताया एक एकड़ में टमाटर लगाने पर करीब 60 हजार रुपए तक लागत आ रही है। इसे मंडी लाने पर एक रुपए किलो तक भाव मिल रहे हैं। ऐसे में रुपए घर ले जाना तो छोड़िए किसान को भाड़ा और हम्माली अपने जेब से चुकाना पड़ रही है।

मंडी में 50 कैरेट टमाटर लाए, 10 ही बिके 40 फेंक गए किसान

ऐसे समझें लागत का गणित

20 रुपए है एक खूंटे की कीमत। इस पर 90 रुपए किलो के भाव से एक क्विंटल तार भी लगता है।

60 हजार रुपए के करीब एक एकड़ में टमाटर की लागत।

3 से 4 आयशर वाहन में मंडी ला रहे फूलगोभी।

90 से 100 रुपए किलो बिक रहा था आठ दिन पहले टमाटर।

8 टन माल एक वाहन में। 2-3 रु. मिल भाव।

15 से 20 पिकअप सहित अन्य वाहनों में टमाटर पहुंच रहा मंडी।

1 एक हजार खूंटे एक एकड़ में लगते हैं

100 कैरेट आती है एक वाहन में। एक कैरेट में 22 से 23 किलो टमाटर।

50 कैरेट में से 10 ही बिके

खारवा से आए रामदास गुर्जर और श्रवण पटेल ने बताया शुक्रवार को 50 कैरेट टमाटर मंडी लाए थे। इसमें से सिर्फ 10 कैरेट टमाटर ही बिक सका। इसके भी सिर्फ 500 रुपए मिले। बाकी के 40 कैरेट टमाटर मंडी में ही फेंकना पड़े। उपज मंडी तक लाने में भाड़ा ही 500 रुपए लग गया। हम्माली अलग चुकाई।

गौशाला में डाल आए टमाटर

सिरसौद के महेश पाटीदार ने बताया भाव नहीं मिलने के कारण मंडी में फेंकने के बजाय टमाटर गौशाला में डाल आए। हमें भले ही भाव नहीं मिले, लेकिन यह गायों के खाने के तो काम आएगा। किसानों ने बताया उपज मंडी लाने पर करीब आठ से दस प्रतिशत आढ़त काटी जाती है। ऐसे में किसान को यहां से खाली जेब ही लौटना पड़ रहा है।

7 से 15 गुना महंगी सब्जी खरीद रहे

मंडी में किसानों को सब्जी का सही भाव नहीं मिल पा रहा है। लेकिन आमजन को बाजार में इनका 7 से 15 गुना तक दाम चुकाना पड़ रहे हैं। मंडी में बमुश्किल 1 से 2 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर बाजार में 15 रुपए किलो तक बिक रहा है। दो से तीन रुपए की फूल और पत्ता गोभी बाजार में 40 रुपए किलो तक बिक रही है। मंडी में पांच रुपए किलो बिकने वाली भिंडी बाजार में 30 रुपए किलो तक बिक रही है।

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