खरीफ फसल पंजीयन 11 सितंबर तक, दो बैंकों का खाता नंबर देना अनिवार्य

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भावांतर में मूंग खरीदी का सोमवार को अंतिम दिन हैं। अब तक पंजीकृत किसान करीब 2 लाख 33 हजार क्विंटल मूंग बेच चुके हैं। जबकि अपंजीकृत किसान लगभग 11 हजार क्विंटल मूंग बेच चुके हैं। 2 लाख 44 हजार क्विंटल मूंग खरीद-बिक्री मंडी में हो चुकी है। भावांतर की खरीदी व्यापारी कर रहे हैं। किसानों को सरकार अंतर की राशि करीब 800 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान करेगी। मंडी सचिव नरेश कुमार परमार ने बताया किसान स्वयं अपने पंजीयन पर उपज बेचने के लिए आएं। दूसरे के पंजीयन पर उपज बेचना या दूसरे व्यक्ति काे अपना पंजीयन नहीं दें। यह आपराधिक श्रेणी में आता है। पूर्व में भी ऐसे मामले आने पर मंडी प्रशासन ने रोक दिए। जांच उपरांत पारिवारिक सदस्य या पिता-पुत्र होने पर अनुमति दी गई है। ऐसे किसान फिर अपंजीकृत श्रेणी में उपज बेचकर जाते हैं। उन्हें भावांतर का लाभ नहीं मिलेगा। खरीफ फसलों के लिए नए पंजीयन समितियों में शुरू हो गए हैं। समिति प्रबंधकाें के मुताबिक सुबह 10.30 से 5.30 बजे तक पंजीयन हो रहे हैं। पंजीयन के लिए एक राष्ट्रीयकृत और दूसरे सहकारी बैंक खाते का खाता नंबर अनिवार्य रूप से लग रहा हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, समग्र आईडी भी होना चाहिए। धान, मक्का, ज्वार, तुअर, सोयाबीन, उड़द, मूंग के पंजीयन शुरू हो गए हैं। देवगांव और तरौन सहकारी समिति के रजिस्ट्रेशन मंडी परिसर में समितियों को आवंटित गोदामों में हो रहे हैं। इसके अलावा बाकी सभी समिति केंद्रों पर पंजीयन शुरू हो गए हैं। पंजीयन 11 सितंबर तक होंगे। मंडी कैंपस में सीसीटीवी कैमरे लगने से शेडों के अंदर की गतिविधियां रिकॉर्ड हो रही हैं।

498 एमएम रिकार्ड की गई बारिश

क्षेत्र में बारिश का आंकड़ा भी कम है। अभी तक 498 एमएम बारिश ही हुई। इसलिए वातावरण में उमस बनी हुई है। पिछले साल इन्हीं दिनों तक 631 एमएम बारिश हो चुकी थी। पिछले साल से कम बारिश हुई है। शुक्रवार रात में शहर में करीब 1 घंटे बारिश हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश की कमी से धान के खेतों में पानी की कमी है।

सेमरीतलां और पचुआ के किसान बिजली समस्या को लेकर हो रहे परेशान

सेमरीतलां और पचुआ के किसान बिजली संबंधी असुविधा को लेकर परेशान हैं। गांवों में बराबर बिजली सप्लाई नहीं मिल पा रही है। जिससे गांव में धान की फसल सूख रही है। बारिश ना होने से किसान सिंचाई समस्या को लेकर ट्यूबवेल पर ही आधारित हैं। शनिवार शाम को इन गांवों के किसान बिजली दफ्तर पहुंचे और सुचारू बिजली देने की मांग की है। शनिवार को बिजली अधिकारी बैठक में गए थे इसलिए किसानों को अधिकारियों के लिए इंतजार करना पड़ा। संबंधित क्षेत्र के जेई के खिलाफ भी किसानों में नाराजगी जाहिर की। सहायक यंत्री विदुर दुबे ने बताया किसानों से चर्चा करके समस्या का निराकरण कराया जाएगा।

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