किसान बोले-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाएं सरकार, प्रमाणिकता साबित होने पर ही बाजार में बिक सके बीज

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उज्जैन | Sep 16, 2018

लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दें। डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर उस मान से रेट तय करके किसानों को डीजल उपलब्ध कराएं। किसान संघ की तहसील इकाई की अगुवाई में शनिवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर को ज्ञापन भी दिए।

तहसील अध्यक्ष राजेशसिंह सोलंकी ने बताया फसलों की अनावारी और गिरदावरी के साथ सात साल की उपज की तालिका बनाकर हर पंचायत में लगाएं। ई-मंडी का लाभ तभी संभव है जब देश की सभी मंडियों के भाव आैर पूरे विश्व की मंडियों के भाव प्रति हेक्टेयर उत्पादन, सकल उत्पादन, फसल वार कृषि चैनल पर रोज दो बार दिखाएं। इसी तरह प्रधानमंत्री के नाम 23 मांगें और सुझाव दिए गए। मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में बाजारों में बीजों का मानक प्रमाणिकता सिद्ध होने पर ही बाजार में बेचने की अनुमति देने और मानक स्तर पर ही खाद, दवाई बाजार में पहुंचाने का सुझाव दिया। साथ ही निजी स्कूलों में फीस निश्चित करने और किताबों का बोझ कम करने पर जोर देने सहित 22 मांगें और सुझाव दिए गए।

कलेक्टर से कहा- फसलों को नुकसान पहुंचा रहे आवारा मवेशी

कलेक्टोरेट पर नायब तहसीलदार को ज्ञापन देते किसान।

गांव-गांव में घूम रहे आवारा मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका निराकरण कराएं। प्रधानमंत्री फसल बीमा 2017 में जो कमियां हैं, उन्हें दूर कर जिन किसानों का बीमा क्लेम रुका है, उसे दिलवाएं। यह मांगें किसानों ने बताई। उन्होंने कहा-सोयाबीन कई स्थानों पर वायरस से खराब हो रही है। उसका सर्वे करवाएं। पूर्व में भावांतर भुगतान योजना के तहत बेची उपज का जो भुगतान महीनों से अटका है, उसे दिलवाएं। मंडी में उपज तौलने के लिए 50 किलो का मानक जो तय किया जा रहा है, उसे लागू करने से पहले किसानों से भी चर्चा की जाए। नगर निगम जो कचरा शहर से एकत्र कर ट्रेंचिग ग्राउंड गाेंदिया ले जाता है, वह रास्ते में गिरता रहता है। जिससे संबंधित गांवों में भी प्रदूषण हो रहा है। इसका निराकरण कराएं।

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