बरमकेला, पुसौर व सारंगढ़ के किसान चालाक हैं सूखा राहत का लाभ पाने शिकायत कर रहें: डीडीए

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रायगढ़ | Oct 05, 2018

बरमकेला व रायगढ़ ब्लॉक के किसान समितियों से धान बीज लेकर फंस गए हैं। जिले में घटिया धान बीज सप्लाई की हैं जिससे खेत में कई किस्म के धान निकल रहे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर इसकी जांच करने की बजाय जिले के कृषि उप संचालक (डीडीए) एमआर भगत उल्टे किसानों पर दोष मढ़ दिया और कहा कि जिले में बरमकेला, पुसौर और सारंगढ़ ब्लॉक के किसान ज्यादा चतुर हो गए हैं। शासन द्वारा सूखा राहत समेत दी जा रही अन्य सभी सुविधाओं का लाभ दोनों हाथों से बटोरना चाहते हैं। इसलिए इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं। मामले में बरमकेला बीज प्रभारी पूर्णिमा रात्रे ने दावा किया है कि कृषि विभाग से इसकी जांच के लिए टीम बनाई गई है, मगर कृषि उप संचालक ऐसी टीम बनने से भी इनकार कर रहे हैं और उन्हें शिकायत नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। यहीं नहीं एमआर भगत किसानों को बीज निगम के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में जाने की सलाह दे रहे हैं। डोंगरीपाली, गोबरसिंहा, लेंध्रा और बरमकेला समेत अन्य समितियों से जिन जिन किसानों ने धान बीज लिया है।

अब उनके खेत में रजगा निकल रहा है। किसान इसका कारण घटिया बीज सप्लाई को बता रहे हैं। जबकि जिम्मेदार अफसर इस मानने को तैयार नहीं है और जांच करने की बजाय लीपापोती करने में लगे हैं।

बीज निगम प्रभारी का दावा- जांच टीम बनी, उप संचालक ने उसे भी नकारा

29 सितंबर को प्रकाशित खबर।

बीज का Rs.200 अधिक दाम दे रहे किसान

बीज निगम ने इस साल बीज के भाव बढ़ा दिए थेे। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष Rs.200 प्रति क्विंटल अधिक दाम पर किसानों ने बीज खरीदा है। बीते साल पतला धान प्रति क्विं. Rs.1800 में मिलता था जो इस बार 2000 व मोटा धान भी पिछले साल 1650 रुपए की अपेक्षा 1950 रुपए में दिया गया। सुगंधित धान में Rs.100 की बढ़ोतरी कर कीमत 2150 से 2250 रु. में सोसायटियों से खरीदा।

रायगढ़, धमतरी में भी ऐसी शिकायतें

अब जब फसल खेतों में तैयार होने लगा है तो पता चल रहा है कि बीज मिश्रित था आधे धान के पौधे में बालिया आ गई वहीं आधा धान का पौधा अभी तैयार ही नहीं हुआ है। इस तरह की शिकायतें केवल रायगढ़ जिले में ही नहीं, बल्कि जशपुर के पत्थलगांव और धमतरी जिले से भी ऐसी ही शिकायतें आ रही हैं। इसकी वजह से पूरे प्रदेश में खराब बीज की सप्लाई ही है। किसानों ने अपने खून-पसीने से इस फसल को बोया और सींचा लेकिन फसल जब तैयार हो रही हैं तो खराब बीज की वजह से धान में बालियां तक नहीं आ रही है।

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